कोरोना।

दोनो एक ही नाम राशि के,
कुम्भकरण और कोरोना।
वो तो छै महीने सोता था,
तुम क्यों जागी कोरोना।U

तहस नहस करने आई हो,
प्रह्लाद की बुआ बन।
हम भी मगन हुए हैं देखो
शॉल बनाकर लेंगे दम।

सेनिटाईज़र शुरु हो गया
वैक्सीन भी बन जाएगा।
सब्र कर रहे थोड़ा सा हम
तुम्हें जलाएंगे मिल हम।✍️

नोट: बच्चों की कविता।😄

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खिचड़ी। “khichdi”

खिचड़ी मेरी ज़िंदगी,
खिचड़ी मेरी जान।
जीभ बिगड़ जाए आपकी,
न खाना कुछ श्रीमान।
न खाना कुछ श्रीमान,
तुम खिचड़ी खाना सीखो।
मेरे जैसा जीवन
तुम अपनाना सीखो।
चार कटोरे चावल हों तो,
तुवर लेना एक ही मुट्ठी।
दस मिनट में बन जाएगी,
होगी बर्तन की भी छुट्टी।
जो परोसे खिचड़ी उसको
सूत्रबतादो देकर प्यार।

खिचड़ी के हैं चार यार,
पापड़ ,मूली, घी, अचार।
स्वाद से फिर तुम
खिचड़ी सब संग
ख़ाकर बैठो ।
पांच बजे तक फिर
बिस्तर में जाकर लेटो।
उठ कर बैठो तब बातें
मन की तुम कर लो
बची खुची खिचड़ी भी
रात की प्लेट में रख लो।
यदि सीखा ये नुस्ख़ा तुमने
मुझसे आकर जी लोगे ,
सौ बरस वहीं तुम पूरे जाकर।

*तुअर-अरहर दाल। ✍️

भारत दर्शन।🇮🇳

मन के मंदिर में थोड़ा ठहर,
मन के बाहर तो भव्य महल।

मन- मंदिर में दीपक सा है तू ,
भव्य महल में तो चहल पहल।

हनुमान के सीने में , राम -सिया,
फिर तू क्यों डोले पागल-पिया?

थोड़ा तू ठहर जीवन की पहर ,
सन्ध्या में बदलने वाली है।

फिर राम अली दिखते संग संग,
रमजान हो या ,दीपावली है ।

मत बांट मनुज धर्मो में तू ,
इतिहास करेगा थू थू थू ।

ये भारत है ये पाक नहीं ।
रखता दिल को क्यों साफ नहीं ।
योगी हैं हम न बने भोगी ,
बदले की कभी कहता जोगी ?

भारत की शाख समझ भाई,
माँ के अपने चार सिपाही

हिन्दू ,मुस्लिम, सिख ईसाई।
मिलजुल कर रहते सब भाई।

🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
Theme_stay inside the temple of mind or soul.Out side the mind there is only the large palace.Inside the soul’s temple you are a lamp.The external temple is only hustle and bustle. Lord Hanuman shows the presence of Rama Seeta (God) in his chest.Why you are wandering madly here and there to find God. Oh ! don’t divide the man in the name of religion . Otherwise the history will abuse you .It is our country India and not the other one.Be pure hearted. You are like a saint to serve and not the enjoyer .The spirit of India is its multifaceted culture like a garland with different flowers. ✍️

यादें (Memories.)

बहुत दिनों के बाद ये बेटी,
संग मेरे आ बैठी ।
सहलाया उसको फिर मैंने,
और उसको बहलाया ।
फिर बहुत दिनों के बाद ,
ये बेटी संग मेरे आ लेटी।
मैंने पूछा” कहाँ गई तू ?”
बोली “क्या बतलाऊँ ।
जैसे तू ढूँढे है मुझको ,
मैं तेरा पता लगाऊं।”
यह सुन कर बोली मैं उससे,
“बेटी दुनिया एक पहेली ।
पर जब भी मैं रहूँ अकेली ,
बन तू मेरी सहेली” ।
○बेटी बोली,” क्या कहती माँ ,
अब भी हूँ मैं आती ?”
मै बोली, ” बिछड़े जो अपने ,
घड़ी वहीं रुक जाती।” ✍️
Translafion_

After a long time
My daughter child
appeared.
I caressed her….
entertained her….
As after a long time
She appeared.
I asked her
Where were you ?
She told…
What is to tell ..
As you were looking me
I was also…
Listening her …
I said,
This life is a quiz game.
whenever I am feeling alone…
You be my friend.
She asked…
What ?
Do you feel my presence
even today ?
I said….
Whenever our own
leave us …
The clock stops that day . 😪✍️

आओ मिलकर झूमें ।🎻

आज नहाया वर्षा में जब ,
पौधे मुझसे बोले,
आजा तू भी बाहर आजा,
अपना भी मुँह धोले।
बहुत दिनों से अंदर बैठी,
बाहर का सुख लेले।
जैसे ही बाहर को झांका,
झूम रहे थे पौधे ।
मैं भी उन संग लगी झूमने,
मास्क गिरा था औंधे।
शीतल पवन ने फिर से ,
अपना मृदु संगीत सुनाया,
हम दोनों ने मिलकर, उसके ,
तालों को दोहराया ।
ताता- धिंन्ना ताता- धिंन्ना,
सुनकर बच्चा आया।
तीनों मिलकर लगे नाचने,
सबका मन हर्षाया।
हाथ पकड़ झूमे थे तीनो,
कितना था सुख पाया।
जल का झोला लिए संग में ,
बादल भी मुस्काया।
हम तीनों के साथ उसे भी,
बड़ा मजा था आया।
हम चारों फिर लगे झूमने,
उसने ढोल बजाया।
बादल के सुन ढोल नगाड़े ,
धरती ने नृत दिखलाया।
ताता थैया ताता थैया,
हमने भी कदम मिलाया।
जैसे मिल हम पाँचों झूमे ,
तुम भी बाहर आओ ।
इस प्रकृति को करो नमन,
इसका आनंद उठाओ।✍️

🌱🎻🌿🎄🍀🌷🎸

Pleasure.🌿

Far away from my way.
These were their days.
With their new choice of bright ray,
They gone away from my way.
Telling me change is always constant.
Try to develop your own resistant .

Moving alone watching my way too long.
Then all at once I saw a crowd.
Wordsworth there I felt a proud.
He holding my hands
ran with me in a green land.
Showing the nature’s treasure with a pleasure.
Finding my world gaining the joy.
I became a child as playing with toy.
As one is blessed by the God.
Me feeling ‘a seed inside a pod ‘. ✍️

कवि की कविता हूँ।

हाँ मैं कवि की इक कविता हूँ।
कवि के भावों की सरिता हूँ।

गंगा सी बहती जाती हूँ ।
जब लोग करें स्नान यहाँ,
मैं पवित्र हो जाती हूँ।
अपने कवि की मैं सविता हूँ।

हाँ मैं कवि की इक कविता हूँ।
कवि के भावों की सरिता हूँ।

कभी रुदन करूँ कभी मुस्काऊँ।
कभी मोहपाश में बंधजाऊं ।
कभी कथा बनी कभी व्यथा हुई।
मैं कवि – शब्दों की नमिता हूँ।

हाँ मैं कवि की इक कविता हूँ।
कवि के भावों की सरिता हूँ ।

कभी विद्यालय का गीत बनी।
कभी मन्दिर की रामायण हूँ ।
भावों में मनिका माला सी,
जो मुखर हुई वो शुभिता हूँ ।

हाँ मैं कवि की इक कविता हूँ।
कवि के भावों की सरिता हूँ।

मैं रोटी में मजदूरों की
जो गीत यहां शहरों के हुए ।
जो फसल काटता मेहनत की,
मैं उस किसान की हरिता हूँ।

हाँ मैं कवि की एक कविता हूँ।
कवि के भावों की सरिता हूँ।

मैं कबीर के दोहे बन
किसी कक्षा में फिर जा बैठी।
जो पाठक को कंठस्थ हुए ।
मैं उन शब्दों की समिता हूँ।।

हाँ मैं कवि की इक कविता हूँ।
कवि के भावों की सरिता हूँ।

मैं शब्दों का संग्रह बन
अपने ही सुर में गाती हूँ ।
जो सुंदर से संगीत हुए,
मैं उन रागों की ललिता हूँ।

हाँ मैं कवि की इक कविता हूँ।
कवि के भावों की सरिता हूँ।

कभी बनी कुरान की आयत हूँ ।
कभी गिरिजाघर की चैपल हूँ।
कभी गुरुद्वारे की गुरुबानी ।
अपने भारत की सुचिता हूँ।

हाँ मैं कवि की इक कविता हूँ।
कवि के भावों की सरिता हूँ।✍️

कभी देश का राष्ट्र गान बनी।
कभी सब धर्मों का प्रेम गीत।
सब लोगों का ले हाथ थाम,
मैं देश प्रेम की निकिता हूँ।

हाँ मैं कवि की इक कविता हूँ।
कवि के भावों की सरिता हूँ। ✍️

सरिता -नदी। सविता-सूर्य। नमिता -नम्र । शुभिता-सुंदर। हरिता-हरियाली । समिता -ज्ञान का संग्रह । ललिता-रागिनी। सुचिता-सूचनादेने वाली । निकिता-गंगा।

अमरलता। (dodder plant)

नारी तन की कोमल
छुई मुई सी।
कुछ शरमाई
कुछ इठलाई
वृक्षो में लिपटी,
पुष्पलता ।

कुछ अति निर्बल
चाहत है प्रबल
मिलते ही सहारा
वृक्षों का,
चढ़ती यूँ जैसे ,
अमर लता ।✍️

नोट:दो प्रकार की लताएं एक– केवल सहारा लेती हैं।दूसरी – सहारे के साथ वृक्ष का भोजन भी शोषित कर लेतीं हैं।(dodder)

रिश्ते दार 🎩

तुमने मुझसे पूछा आज
क्या होता है रिश्ता ?
किसको कहते रिश्तेदार ?
दिल से दिल की बात हुई जब,
तब रिश्ते बन जाते हैं।
इन रिश्तों को तोड़ें जो
वो रिश्तेदार कहलाते हैं।

*(यहां कविता में रक्त सम्बन्धी रिश्ते के बारे में चर्चा नहीं है।यहां समाज में रिश्तों की दारी(रौब) जो दिखाते हैं । )