माया महा ठगनि हम जानी ।😪😀

माया महा ठगनि हम जानी
दुनिया ये मनमानी।
जब बेटी की उठी थी डोली
माँ रोते बापू से बोली,
क्यों बहे तुम्हारीआंखों से,
इतना झर झर पानी
अब तो चित भी उसकी
पट भी उसकी।
जैसे , घर की मैं पटरानी,
बिटिया भी होगी
उस घर की महारानी।
सुन कर
बातें बिटिया की माँ की,
बापू को हुई हैरानी ।
थोड़ा सा फिर वो मुस्काए…
देखा 🙄
बिटिया की माँ को …
बोले ,
” . ये माँ महा ठगनि हम जानी।”😀✍️

नोट-चित-पट (माइका-ससुराल)

वो फिर याद आई ।🌹🙏

सवेरे सवेरे महिला दिवस की बधाई का msssage मिला।माँ सामने आ खड़ी हुईं हैं उसी कतार में जहाँ साहसी और व्यवस्थित महिलाओं के दर्शन पाती हूँ । वो एक घरेलू महिला थीं लेकिन उनमें कभी इंदिरा गांधी कभी लक्ष्मी बाई कभी मदर टेरेसा दिखाई देतीं। वो गुलशन नन्दा के उपन्यास का जमाना था लेकिन माँ शिवानी के नावेल पढ़ा करतीं। ,कृष्ण कली, अतिथि उनको पढ़ते देखा था । महादेवी वर्मा सुभद्रा कुमारी चौहान की कविताएं उनको प्रिय थीं। उनकी डायरी के कुछ पेज पढ़े हैं जिसमें महीने के आखिरी दिनों में प्रेस वाले से लेकर दूध दहीं अखबार का हिसाब लिखा देखा है। एक दो पन्नों में हम बेटियों को कुछ अच्छे तौर तरीके के विचार भी दिए हैं।
उनकी पसंद की कविता, माँ कह एक कहानी बेटा समझ लिया क्या तूने मुझको अपनी नानी ……कहती है मुझसे ये चेटी तू मेरी नानी की बेटी कह माँ लेटी ही लेटी राजा था या रानी….कह माँ एक कहानी….। वो जब भी यह कविता कहतीं हम भाव विभोर हो जाते।
माँ को याद करते हुए छोटी बहिन ने कहा था सेंट जोंस कॉलेज जाते समय वो हमारा लंच बॉक्स रखने से पहले उस रिक्शे वाले को खिलातीं जो कॉलेज ले जाता था। भले ही कॉलेज को देर हो रही होती। माँ घर में काम करने वाली आशु से बहुत स्नेह रखतीं और उसके लिए भी हर बार कुछ खरीद के लातीं जब घर के बच्चों के लिए कुछ आता। उसके परिवार की भी आवश्यकताओं की पूर्ती करतीं।
माँ के पिता से गुस्से का तरीका बड़ा विशिष्ठ था वो जब भी डैडी से नाराज होतीं तो उनसे बात नहीं करतीं तब डैडी हमसे कहा करते जरा पता लगाओ माँ क्यों नहीं बोल रहीं हैं। दूसरे तीसरे दिन वो नाराज़ी दूर हो जाती ।
माँ अपने माईके में अपने भाई बहनों में सबसे छोटी और विवाह के बाद सबसे बड़ी बहू बनी। उनकी एक अंगुली थोड़ी टेढ़ी सी थी वो बतातीं चाचा को फीस के लिए अंगूठी दे दी थी जब तुम्हारे डैडी को मालूम हुआ तो वे नाराज़ हुए थे चाचाजी पर । उनको बचाते समय ही मेरी अंगुली में लगी थी।बहुत पुरानी बात थी ये तब चाचा छोटे थे।
माँ के लिए डैडी हर वर्ष 2 अक्टूबर को गांधी आश्रम से प्योर सिल्क की साड़ी उपहार लाते जो उन्हें बेहद प्रिय थीं।……..
सवेरे भजन के बाद सर्वा बाधा विनिर मुक्तो धन धान्य सुतान्वितो मंत्र अवश्य कहतीं ।
महिला दिवस बधाई के इस बीच कई मेसेज आ गए हैं।
एक मैसेज में लिखा है,
🙏यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते,रमन्ते तत्र देवता:🙏
(जिस समाज में स्त्रियों का सम्मान होता है वहां दिव्य शक्तियां निवास करती हैं) 🙏सद्गुणों से सम्पन्न नारी सर्वदा सभी रूपों में पूजनीय है🙏
मैं मन्दिर की ओर देखती हूँ साक्षात माँ के दर्शन होते हैं मैं दिया प्रज्वलित कर माँ से कहती हूँ ,माँ महिला दिवस की बधाई । आपकी सभी बेटियां अपनी अपनी सीमाओं में सफल एवम “आनंद” मयी हैं।🌹🙏

लेखनी को पहली फटकार।😒

जब भावों के पुष्प लिए,
मैं पहुँची उनके पास।
छप जाएगी कविता मेरी,
मन में थी यह आस।
पर जिस कविता में लग
सिर्फ मेरी अकल
उनको लगी वो किसी
कवि की नकल।
हिंदी की थी वो एक ज्ञाता
उन्हें भला था कब यह भाता।
बोलीं, ये नकल वकल नहीं चलेगी
विज्ञान की छात्रा भी क्या कवि बनेगी।✍️

भूमिपुत्र के अश्रु।🌾🌾🌾😪🌾🌾🙏

नेता कितना हठी हठी सा
हठ इसका कब जाएगा…
इन सर्द ठण्डी सड़कों में
क्या किसान मर जाएगा..
है कितनी रातें ये सर्द ,
जब बादल गरजा करते हैं।
निष्ठुर पापी दुश्मन से वो ,
जम के बरसा करते हैं।
सड़कों पे देखो नदियां सी,
कितनीं हैं बह जातीं।
हाय लहर उन नदियों की,
उसकी चादर तक आतीं ।
तब नेता ब्लोअर में
मदमस्त नींद सोता है।
भक्तों का विश्वास लिए वो
मन की बात कहता है।
इक किसान के अश्रुओं ने
ऐसी क्रांति मचाई…
हर इक बूंद अश्रु की उसकी
बन नदी, गाँव तक आई ।
हर कोई उस जल से सिंचित
उस ओर चला आया था।
जिस ओर, उस भूमि पुत्र को,
नेता ने बहुत रुलाया था।
दिखा किसानी-धर्म वहां बस
और न कोई धर्म दिखे।
संविधान की शक्ति दिखे
और अश्रु की भक्ति दिखे।
जर जोरू जमीन का झगड़ा
नेता अब न दिखाओ तुम।
जिनसे महाभारत युद्ध छिड़ा
जिद्द ववेसी अपनाओ तुम
‘जयश्री राम’ चिल्ला चिल्ला कर
भारत को मत तोलो ।
सब धर्मों का करो मान फिर
भूमि-पुत्र संग ,बैठ के तुम भी सत श्री अकाल,असलम अलैकुम,
‘जय सिया राम जी’ बोलो । ✍

वो तीन घण्टे ।🙄☺️

वे तीन घण्टे पल की तरह छोटे थे। कितने बंधे बंधे से थे । हाथ की नोट books बाहर रख examination room में enter करना लगता सब कुछ भूल चले थे।
Answer sheet मिलते ही Roll numberआदि लिखना। Question paper देखने से पहले मन ही मन ईश्वर का स्मरण करना।
पेपर मिलते ही पूरे प्रश्न-पत्र को देखना कि कितने प्रश्नों के उत्तर आते हैं। 10 मिनिट तो इन्ही कामो में लग जाते।
प्रश्नों का उत्तर लिखते हुए बीच में ही invigilator का first page check करना बुरा लगता ।
दूसरे प्रश्न का उत्तर पूरा भी न हो पाता कि घण्टे की टन्न की ध्वनि सतर्क करती कि एक घण्टा हो चुका।
दूसरा घण्टे में दूसरा तीसरा पूरा होते होते चौथे प्रश्न को पढ़ रहे होते थे और
चौथा प्रश्न शुरू ही किया होता कि घण्टे की टन्न आवाज फिर सतर्क करती कि बस अब एक बचा है ।
पांचवां प्रश्न का उत्तर शुरू ही किया होता तो अचानक वो घण्टा बचता जिसमें invigilator कहती केवल 15 मिनिट बचे हैं इसके साथ ही एक सफेद सुतली(thread) सबके table में रख कर कहतीं कॉपी बांध लो, bind your answer sheets.
उनके आगे ही बढ़ते हम फिर लिखना शुरू कर देते थे।
कुछ तो तब तक खड़ी रहतीं जब तक कॉपी बांध न लें।
कैसा भयानक होता था वो पल जब अगले अंतिम घण्टे की आवाज बजते ही invigilator कॉपी छीन कर ले जातीं।
बाहर आते ही हम question paper में solved questions पर टिक करते । कई पेपर तो बहुत अच्छे जाते पर कुछ में प्रश्न छूट भी जाते थे।
अब लगता है वे तीन घण्टे जीवन का सार थे । ✍️

छूटी तब आशा ।😪

सेवा भाव संग
कर्त्तव्य लिए,
रहता संग भय भी,
करता था, अतृप्त
अब छोड़ चला
हो गया हूँ तृप्त।
‘आशा’ की चिंता
सेवा में,
मैं मग्न रहा
होकर निर्विघ्न।
आशा ही तो
जीवन थी मेरा
पर आज मुझे तो
जाना है।
अब मृत्यु-शांति
संगिनी है मेरी
उसका भी साथ
निभाना है। ✍️

कुछ कुछ समझ न पाई।🤔🤗

इक बच्चे ने आकर
मुझको बातें हैं समझाईं।
मासूम है जीवन अपना
मगन रहो मेरे भाई।

कुछ तो समझ गई मैं पर,
कुछ कुछ समझ ना पाई।

एक तरुण ने आकर
मुझको बातें हैं समझाईं।
जितनी कर सकते हो मेहनत
कर लो मेरे भाई।
जीवन तो है इक जुगाड़,
तुम जोड़ लो जितना भाई।

कुछ तो समझ गई मैं पर,
कुछ कुछ समझ ना पाई।

इक वयस्क ने आकर
मुझको बातें हैं समझाईं।
जितनी चिंता कर सकते हो,
कर लो तुम मेरे भाई।
घड़ी जो निकली जाती है,
फिर लौट कभी न आई।

कुछ तो समझ गई मैं पर,
कुछ कुछ समझ ना पाई।

एक बुजुर्ग ने आकर
मुझको बातें हैं समझाईं।
दो पल के जीवन में अपने
थी समुंद्र गहराई ।
इक दिन आने का था बस,
इक दिन जाने का भाई।

थोड़ा थोड़ा समझी हूँ ,
जब पल में भूलूँ भाई । 🤔 ✍️


* * * * * * * * * * * * *

सिंघु बॉर्डर।🎉🇮🇳🙏🌱🌾⛏️🚜

मन हुआ नमन
उस राह में जाकर,
जहां बैठा था किसान,
जमीं लुटने से घबराकर।
अपने भारत के दर्शन,
हो जाते यहां पर आकर।
जैसे ईश्वर के दर्शन,
हो जाते मन्दिर जाकर ।
खुदा स्वयं मस्ज़िद से आए।
हर वाणी में गुरुद्वारा।
कितनी ताकत से बैठा है,
मेरा देश ये प्यारा।
कुछ उद्घघोष यहां से आते,
थे नारा एक लगाते।
जय जवान और
जय किसान सुन,
नेता थे डर जाते।
हर नेता व्यापारी था अब,
इनके गुरु गुजराती।
नंबर वन के व्यपारी सब,
नाचें ज्यूँ बाराती।
झूम रहे जो कुर्सी पाकर,
उनसे देखा ना जाता,
जब अन्न उपजाने वाला
खुलकर पीज़ा खाता।
नेता के कल्चर का पीज़ा
भी है ,खेत की माया ।
इनकी ही तो मेहनत से
खेत हरा लहराया।
सब धर्मों के बीच में
देखो कैसे खोदे खाई।
ये ना जाने संविधान का
नाता पक्का भाई।
आशीर्वाद सभी का
है किसान के मत्थे।
वाह गुरु दा खालसा
वाह गुरु दी फतेह। ✍️

In

अंतिम साँसे।😴

देखो दुनिया से जा रहा है वो।
खाली खाली साआया था ।
खाली खाली ही जा रहा है वो।
जिन साँसों ने साथ दिया
उन्हें ही छोड़े जा रहा है वो।
सांसे जो गिनती की शर्तों में
साथ देने आईं थीं,
उनकी ही विदाई किये
जा रहा है वो…
ओह… ✍️