तिरंगा। 💝🙏

सच में तिरंगा कितना प्यारा।
हम सबको ये लगता न्यारा।
हरा रंग हरियाली देता ।
शांत ‘श्वेत रंग’ मन को करता ।
केसरिया कितना बल भरता।
चक्र हमें चलने को कहता ।
भारत माँ का राज दुलारा।
हमें तिरंगा कितना प्यारा। ✍️
,🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳

उम्र- दराज़🎈

जैसे जैसे उम्र है निकली
रिश्ते बिखर गए।
जैसे जैसे उम्र बड़ी तो
वो भी निखर गए ।
झूठे सपने पाल रहे थे।
जो अब उनको
साल रहे थे।
सपने और उनके अपने भी
जाने किधर गए….
जैसे जैसे उम्र है निकली
रिश्ते बिखर गए।

विधि के विधान का लेख
है अपना,
“आज रहे जो
“कल हो सपना”
पल भर के अपने सपने
निंद्रा में इधर रहे।
नींद खुली तो तन्द्रा में ,
वो भी बिफर गए।
जैसे जैसे उम्र है निकली
रिश्ते बिखर गए।

हँस कर बोला तब एकांत,
“आ बैठ पास होकर के शांत।
मड़ा बहुत जीवन को तूने,

पल अब आया है निशांत। “

सपने में ही जीवन के
सारे दिन गुजर गए।
जैसे जैसे उम्र है निकली…..✍️

कमाल खान नहीं रहे।😪

कभी कभी दुख सुख पर कितना हावी हो जाता है।सवेरे सवेरे शकरपारे बनाए मकर संक्रांति के लिए।
कुछ देर पहले ही ndtv के reporter कमाल खान जी के अचानक निधन की दुखद खबर सुनी । त्योहार एक ओर रह गया है ।
बहुत बुरा लग रहा है। कितना अपनत्व था उनकी आवाज में । लखनऊ की गरिमामयी विनम्र भाषा के symbol थे कमाल खान जी । घर का एक सदस्य बन गए थे वो । 🙏

सर्व धर्म समभाव।🌺🙏

घृणाभाव से जला था दीपक
दीपक में लग गई थी आग।
उस आग से जल कर बत्ती,
बनकर बैठ गई थी नाग।
दिया नही था पूजा का वो,
जो रखा पूजा की ओट।
उसी ओट से नकली हिन्दू,
करते है धर्मों पे चोट ।
दया भाव है धर्म हमारा
धर्म सभी देते हैं ज्ञान।
इसी लिए तो सब धर्मों का,
हम करते आए सम्मान ।
धर्मों से कैसा बंटवारा
धर्म सभी का अपना प्यारा ।
लोगों को भयभीत करा जो
मांगा करते धरम का वोट ।
इसी वोट से गद्दी आई।
भस्मासुर ने शक्ति पाई।
रहना इनसे सावधान।
‘सब धर्मों का हो सम्मान।
धर्म हमे देते ये ज्ञान । ✍️

वो ग्रीटिंग कार्ड्स।🌹✍️

कभी एक craze था New year’s Day में अपने near and dear ones के जितने greetings आते उन्हें ड्राइंग रूम में सजाते उन्हें गिनते और room में आते ही सबका center point of attraction भी वही रहता ।कोई कहता इतने सारे । कोई कहता इतने सुन्दर, कोई message पढ़ता । घर में भी वो कार्ड्स सबकी आंनदित करते।
December के last week से ही एक उत्साह greeting cards खरीदने का होता था । ये बड़ा interesting task हुआ करता ।
कल यूँ ही drawing room का वो किनारे वाला corner table बहुत सूना सा लगा।
बस क्या करती उस table पर एक table clock रख दी।
सब समय के साथ ही तो बदलता रहा है। Whatsapp में ग्रीटिंग्स आईं हैं अधिकतर ‘forwarded’ messages हैं ।
उनमें केवल phone no. ही तो हैं । घर के address तो कहीं गुम से गए हैं ।
बस खोई हुई सी हैं उनकी मीठी यादें साथ चल रहीं हैं……✍️

अलविदा 2021🎈💕

जितना भी हम होल्ड करेंगे

उतना छूटा जाएगा।
बीते तो थे तीस दिन

पर महीना एक बताएगा।
देखो काटे बारह महिने

पर वर्ष एक कहलाएगा।
स्वयं अकेले आए थे हम

स्वयं अकेले जाएंगे।
अपने संगी साथी हंस कर

हमको ये बतलाएंगे।
20/20 क्रिकेट मैच सा

वर्ष ये भी चला गया।
कुछ old जो hold किया था,

बालू सा हाथों से फिसल गया।
फिर अनजाने दिन आएंगे
दिन बीतेंगे महीना बन कर

महीने वर्ष बन जाएगा।
दो विदाई बीते को अब
संग यादों को लेकर के ।
दुख सुख जो भी मिला हमें
वो अनुभव है भवसागर का।
पल भर उसकी लीलाएं ,
खेल है ये नटनागर का।✍️

चाचा नेहरू बहुत हुए दिन.. 🌹🙏

चाचा नेहरु बहुत हुए दिन
अब वापस आ जाओ ना।


हम हैं छोटे छोटे बच्चे,
ना हम हिन्दू ना हम मुस्लिम
ना हम सिख ईसाई हैं।
इन बे मतलब बातों को
भारत से दूर भगाओ ना।
चाचा नेहरू बहुत हुए दिन ….

हिन्दू कहते मन्दिर बनना
मुस्लिम कहते मस्ज़िद बनना।
ना मन्दिर ना मस्ज़िद,
हमको विद्यालय खुलवाओ ना।
चाचा नेहरू बहुत हुए दिन ….

हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई
आपस में हैं भाई भाई,
क्यों बातों बातों में लड़ते,
इनको डाँठ लगाओ ना।


चाचा नेहरू बहुत हुए दिन
अब वापस आ जाओ ना।🌹
………….. ✍️

“श्रद्धा में शक्ति।”Power in faith.(भैया,-दूज दिवस पर). 🙏🎉💕🎉🙏

आज उस विज्ञापन को देख कर याद आया जो रिश्ते भले ही पल भर के हों लेकिन अक्सर याद आते हैं।
मेरी बहन दीपा भाई को प्यार से मनीष कहा करती थी ।सभी बहने भाई से बड़ी थीं इसीलिए भाई के आगे पीछे रहतीं।
उस दिन दीपा भाई को साईकल की अगली सीट पर बिठा भीड़ भरी सड़क पर निकल गई। तभी अचानक पीछे से आने वाली आर्मी मिलिट्री ट्रक से साईकल का पिछला हिस्सा टकराया और दोनों सड़क के किनारे गिरे। घर में दूध देने वाले ने बताया कि रास्ते में बिटिया की साईकल ट्रक से टकराई है। भैया को सिर पर चोट आई है। मेरे पिता बहुत भावुक थे इसीलिए आशा छोड़ दी थी। पर तुरंत उस स्थान पर पहुँचे जहाँ बहन ने बताया जैसे ही हम गिरे पास में ही एक आदमी सड़क में झाड़ू लगा रहा था वो ही उस भीड़ के बीच से उठा कर भैया को कन्टोन्मेंट अस्पताल ले गया।
पिता को उस सफाई कर्मचारी में लगा जैसे ईश्वर के दर्शन हुए हों।हालाकि वह कर्मचारी वहाँ न थाऔर न ही मेरे पिता ने उसे देखा था। बहुतों के कहने पर भी पिता ने वह हॉस्पिटल नहीं बदला। वे बोले जहाँ वो व्यक्ति ले आया इलाज वहीं होगा।

श्रद्धा से उतपन्न इन रिश्तों में कितनी शक्ति होती है ये धर्म जाति को पीछे छोड़ जाते हैं ।केवल उस रिश्ते का व्यक्तित्व सामने आता है..।
मुझे याद है अपने बचपन की हम बबीना कैंट में रहते थे।पिता के साथ प्रतिदिन सुबह walk पर निकलते । घर से कुछ दूरी पर ही मन्दिर गुरुद्वारा और मस्जिद एक के बाद एक थे। पिताजी हमें उसी क्रम से मन्दिर ले जाते मन्दिर के पंडितजी हमें एक केलिन्डर दिखाते कि अगर इस जन्म में अच्छा काम करोगे तो स्वर्ग जाओगे बुरा काम करोगे, झूठ बोलोगे ,चोरी करोगे तो आग में रखी तेल से भरी गरम कढ़ाई में तले जाओगे। मन्दिर से बाहर आकर हम वाहे गुरु का नाम लेकर प्रशादा लेते और मत्था टेकते ।मस्ज़िद आने पर हम रुकते और फिर सजदा करते । पिता की दी गई उस सीख में पूर्ण श्रद्धा थी।
बहुत शक्ति थी उनकी श्रद्धा में । भाई जल्दी ही स्वस्थ होकर घर आया। लगा जैसे मन्दिर, मस्ज़िद, गुरुद्वारा सभी का समागम मेरे घर मे हो गया हो । सभी आकर स्वस्थ होने की बधाई दे रहे थे। ✍️

जश्ने Truth.🙏

ये तेरा ये मेरा इसी जनम का प्रश्न है।
साँसों के संग छूट जाएंगे
मन के सारे टशन हैं ।

मेरा तेरा तेरा मेरा
इसी जनम का प्रश्न है ।
देखना जाएंगे जब हम,
मनता कैसा जश्न है ।

दुनिया में आने के छै दिन बाद
हमारी छठी मनी।
जाने के बस तीन ही दिन में
होने लगी उठावनी।🌠

पांच माह में हुआ अन्नप्रासन।
क्या क्या हमें खिलाया था।
जाने के बारहवीं में पूछें,
कितनों को खिलाना है।

एक बरस तब मना जन्मदिन,
अब बरसी कहलाएगी।
जन्मदिन में बंटी मिठाई,
अब ज्योती जल जाएगी।

जीवन तो आना जाना है ।
कुछ दिन का ठौर ठिकाना है।
आज है उसकी बारी,
कल अपना नंबर आना है।

कुछ यादें बस छोड़ चलेंगे।
लेने का ना कोई प्रश्न है।
देखना जाएंगे जब हम ,
मनता कैसा जश्न है। ✍️