वो इंटरव्यू

वो 2004 का वर्ष था। मुझे विद्यालय की दूसरी विंग join करना थी । स्थानांतरण हुआ था । वर्तमान प्रधानाध्यापिका के रूम में बहुत भीड़ थी ।मैं बाहर लगी कुर्सियों मैं बैठी इंतज़ार करने लगी थी। याद आने लगा था । 20 वर्ष पूर्व इसी विंग में इसी corridoor में घंटो बैठी मैं interview के इंतज़ार में headmistress के रूम को देखती । न्यूज़पेपर में विद्यालय की टीचर्स requirement निकली थीं। घर मे आटा गूंध कर जल्दी जल्दी आई थी।
हाथों में नजर गई तो कुछ उंगलियों में आटा हाथ धुलने पर भी लगा रह गया था। मैंने वही चेयर में बैठे बैठे हाथ साफ किया था। फिर अचानक चौकीदार ने कहा बड़ी मैडम ने बुलाया है मैं उनके रूम में गई वे बोलीं । You are sitting there for a long time.What’s your problem? डरते हुए मैं बोली थी।Madam l was waiting for my interview. वे बोली यहां नहीं आप main school में जाइए। मैं घबरा कर टेम्पो से पहुंची थी ।ईश्वर के आशीर्वाद से मेरी नियुक्ति विद्यालय में हो गई थी।वो ग्वालियर का नामी विद्यालय था । अब 20 वर्ष बाद….. कल अचानक मुझे स्कूल सेक्रेट्री ने बुला कर इस विंग का पद भार संभालने को कहा था पर written कुछ नही दिया था । इन बीस वर्षों में इस विंग की हेड बदल गईं थीं । जैसे ही हेड मिस्ट्रेस के रूम से लोग गए मैने उन्हें बताया मैडम मेरा ट्रांसफर यहां हो गया है ।उन्होंने बड़े प्यार से मुस्कुराते हुए कहा कहा आप साइंस टीचर हो न ? बैठिए आपको टाइम टेबल में adjust कर दूंगी स्टाफ रूम में बैठिए। कोई लेटर मेरे पास भी नही था । शायद उनके पास भी कोई इनफार्मेशन नही पहुंची थी। अचानक वे इंटरवल में स्वयं स्टाफ रूम आईं थीं 30 टीचर्स और मैं खड़े हो गए थे। वे बोली सॉरी मैडम आपने बताया नहीं आप मेरी जगह आई हो मुझे अभी अभी लेटर मिला है। वे अति सौम्य एवं गंभीर महिला थी । मेरा हाथ पकड़ वे अपनी चेयर तक ले गईं। मैने बैठने से मना किया था। वो मेरे से बहुत सीनियर थीं। वो भी चेयर में नही बैठीं थीं । स्कूल एडमिनिस्ट्रेशन का यह निर्णय अत्यंत गोपनीय था। ना मैं जान पाई थी ना ही मैडम। दूसरे दिन सेक्रेटरी ने letter दे दिया था और कुछ targets देकर बोले अपनी चेयर में बैठिए और स्कूल की responsibilities संभालिए । दूसरे दिन लगा जैसे मैं विक्रमादित्य की seat में बैठी थी। सभी टीचर्स को information मिल गई थी वो wish कर रहीं थी लगा ये wish विक्रमादित्य की सीट को है जिसमे आज मैं बैठी हुई थी।✍️

Published by (Mrs.)Tara Pant

बहुत भाग्यशाली थी जिस स्नेहिल परिवार में मेरा जन्म हुआ। education _B.Sc. M.A.M.ed.

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