“आशिफ़ा”

आ बेटी आशिफ़ा आ …
गोदी में मेरी तू आ …
आँसू से नहलाऊंगी…
तुझको मैं सहलाऊंगी।
थोड़ा सा ले पानी पी…
थोड़ा सा ले खाना खा।
आ बेटी आशिफ़ा आ।
गोदी में मेरी आजा….
धर्म से फिर विश्वास उठा है….
बस दर्द तेरा अहसास हुआ है…
आ थोड़ा सा पानी पी….
संग में मेरे खाना खा।
आ बेटी आशिफ़ा आ।
आज निर्भया दिवस मनाया…
उसकी माँ संग जश्न मनाया….
आ तू भी संग मेरे आ .
आ बेटी आशिफ़ा आ ..
गोदी में मेरी आजा । ✍️

Published by (Mrs.)Tara Pant

बहुत भाग्यशाली थी जिस स्नेहिल परिवार में मेरा जन्म हुआ। education _B.Sc. M.A.M.ed.

One thought on ““आशिफ़ा”

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