बंगला नंबर 10

22 quarters की उस छोटी सी कॉलोनी में कुछ दिनों पूर्व ही बंगला नंबर 10 मिसेस कुशवाह को अलॉट हुआ था। दो बेटियां और एक बेटे की माँ थीं वो ।अक्सर अपनी बड़ी बेटी को organic chemistry पढ़ाया करती थीं। कुछ इस तरह से कि उनकी आवाज से मुझे भी Organic compounds acids अल्कोहल के फॉर्मूले revise होने लगे थे।
कॉलोनी में आने के कुछ ही दिनों बाद उनके घर से अजीब तरह की क्रोध भरी आवाज आने लगी थी। वो मिस्टर कुशवाह की आवाजें थीं । कभी कभी अपने इस क्रोध में वे गन्दी गालियों का उच्चारण करते और पत्नी पर हाथ उठाने की आवाजें भी आतीं। ऐसे समय वो अपने बच्चों से दूसरे रूम में चले जाने की बात करतीं । सवेरे फिर सब सामान्य सा हो जाता था । दुबली पतली मिसेज कुशवाह एक सुंदर आकर्षित व्यक्तित्व की महिला थीं।
उस दिन sunday था । वे बाहर धूप में बैठी थीं। यूं ही बात करने के बहाने मैंने कहा ,मैडम आज धूप अच्छी है । वो मुस्कुराईं फिर वे अक्सर अपने कॉलेज से वापस आते समय मुझसे मिलने आ जातीं थीं। उनकी सहनशीलता को देख मैने पूछ ही लिया था ,” आपने क्या प्रेम विवाह किया था ?” वे बोलीं नहीं नहीं हम कुशवाह हैं ना मिसेज पंत ,हमारे यहाँ अधितर लड़के की खेती जमीन-जायदाद देखकर लड़की को देते हैं। ये पढ़े लिखे नही थे लेकिन जमीन खेती थी मेरे ससुर जी की । पीने खाने की आदत थी इन्हें । घर से लड़ लिए। मेरे पिता सरकारी शिक्षक थे इसीलिए हम बहनों की शिक्षा में कोई बाधा नहीं आई।। वे बोलीं M.Sc. B.ed. करते ही मेरी लेक्चरर posting हो गई थी। M.ed. करते ही शिक्षा महाविद्यालय में ट्रांसफर होने से मकान भी मिल गया। मेरे तीनो बच्चे पढ़ाई में बहुत बुद्धिमान हैं। मैनें पढ़ाई में इनके concept बिल्कुल clear रखे हैं। जाते जाते उन्होंने बड़े अपनेपन से कहा ,” बच्चे पढ़ लें फिर अपने पहनने खाने के शौक पूरे करूंगी। बिना सोचे समझे उनसे बोल बैठी थी मैं , मैडम अगर आप बुरा ना माने तो मेरे तीन brand new सूट्स हैं जरा नापिये । वे थोड़ी ही देर में सूट पहन दिखाने आ गईं थीं। अक्सर वही सलवार सूट पहने वो कॉलेज जाया करतीं थीं। मुझे पहली बार अपने कपड़े बहुत मूल्यवान से लगे थे।
मिसेस कुशवाह ने बताया था कि ” शाम को अक्सर कुशवाह साहब उनसे 100 -200 रुपये मांगते हैं बोतल के लिए कभी न देने पर वे अशांत हो जाते हैं। अब तो वे गालियां चिल्लाकर ऐसे देते हैं जैसे श्लोक का उच्चारण कर रहे हों। एक दर्द छुपा था उनकी इस बात में।
उस रात कॉलोनी के 4- 5 पड़ौसी हमें भी बुलाने आ गए थे । बोले 10 नंबर के इस आदमी को ठीक करना है । ये इतनी भद्दी गालियां दे रहा है कि इनकी गालियां हमारे घर तक पहुंच रही हैं। इसके घर में भी तो बच्चे हैं। शायद उस दिन वे अपने कमरे की खिड़कियां दरवाजे बन्द करना भूल गईं थीं इसीलिए आवाजें उन पड़ौसियों तक पहुंच गईं थीं। उनके call bell बजाने के थोड़ी देर बाद मिसेस कुशवाह घर से बाहर आईं थीं । सभी को नमस्कार किया । फिर उनमें से एक पड़ौसी बोले आप कुशवाह साहब को बाहर बुलाइए उन्हें समझाना है । वो आपको ऐसे कैसे मार सकते हैं और गालियां दे सकते हैं ? मिसेस कुशवाह बोलीं ,”ये मेरा आंतरिक मामला है। माफ कीजिएगा । वो सवेरे ठीक हो जाएंगे । भविष्य में आप लोगों को परेशानी नही होगी ।” उन्होंने अपने खिड़की दरवाजे बंद कर दिए थे ।
दूसरे दिन वो बहुत रुवांसी सी मेरे पास आई थीं बोलीं मैडम मुझे मकान छोड़ना ही होगा ये नही मानते । कल पड़ौसियों को भी कुछ कह बैठे तो बुरा होगा । बहुत डरती हूँ मैं ।
कुछ दिनों बाद वे स्वयं ही 10 नंबर बंगला छोड़ कर किसी मोहल्ले के छोटे से मकान में शिफ्ट हो गईं थीं ।
आज बंगला नंबर 10 सूना था । एक शांत सी पढ़ी लिखी महिला की पीड़ा बंगला नंबर 10 छोड़ कर किसी मोहल्ले के छोटे से मकान में शिफ्ट हो गई थी ।✍️

Published by (Mrs.)Tara Pant

बहुत भाग्यशाली थी जिस स्नेहिल परिवार में मेरा जन्म हुआ। education _B.Sc. M.A.M.ed.

4 thoughts on “बंगला नंबर 10

  1. पितृसत्तात्मक भारतीय समाज में स्त्रियों की वास्तविक दशा को दर्शाने वाला यह संस्मरण वाक़ई परिवारों में दोहरे मापदंड और विसंगतियों को बख़ूबी चित्रित कर रहा है।पढ़ -लिख कर भी वह नारी अबला कैसे रह गई ??

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