मेरे अपने

इस दुनिया मे कितने आए,
कितने आकर चले गए।

कितने दिल मे बसे रहे,
कितनो को हम भूल गए ।

कितने फूलों की खुशबू से,
अब भी महका करते हैं।

कितने आंगन के पंछी बन,
अब भी चहका करते हैं।

जितने जलसे हुए खुशी में ,
बन आशीष ‘वो’ संग रहे।

यह जीवन होली सी रंगत ,
‘वो’ रंग की रंगत बने रहे।

जितने दिल मे आप बसे हो,
‘वो’ भी दिल मे बसे रहे।✍️
🌹💐❤️🙏

Published by (Mrs.)Tara Pant

बहुत भाग्यशाली थी जिस स्नेहिल परिवार में मेरा जन्म हुआ। education _B.Sc. M.A.M.ed.

19 thoughts on “मेरे अपने

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