दादी के दोहे ,🤓

देखो मेरा मस्त कलंदर ,🎈
मूंछें लगा के बना सिकंदर।🎩
दौड़े सरपट बाहर अंदर,
जैसे राजा कोई धुरन्धर ।👑
मैं कहती हूँ आजा बन्दर,🐒
आजा कर लें, ‘सन्धि पुरंदर’ ।
तुझे खिलाऊँ मैं चुकन्दर,🍭
दोनो मिल फिर चलें जलंधर।
देखो मेरा मस्त कलंदर🎈
मूंछें लगा के बना सिकंदर।…✍️

Published by (Mrs.)Tara Pant

बहुत भाग्यशाली थी जिस स्नेहिल परिवार में मेरा जन्म हुआ। education _B.Sc. M.A.M.ed.

13 thoughts on “दादी के दोहे ,🤓

  1. Modern dadi के दोहे सुन पोते ने आनन्द जरूर लिया होगा । अति सुन्दर वर्णन किया है ।

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  2. बहुत सुंदर वर्णन किया है… हमें इतना मजा आया तो उज्जवल को तो और भी मजा आया होगा।

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