अमरलता। (dodder plant)

नारी तन की कोमल
छुई मुई सी।
कुछ शरमाई
कुछ इठलाई
वृक्षो में लिपटी,
पुष्पलता ।

कुछ अति निर्बल
चाहत है प्रबल
मिलते ही सहारा
वृक्षों का,
चढ़ती यूँ जैसे ,
अमर लता ।✍️

नोट:दो प्रकार की लताएं एक– केवल सहारा लेती हैं।दूसरी – सहारे के साथ वृक्ष का भोजन भी शोषित कर लेतीं हैं।(dodder)

Published by (Mrs.)Tara Pant

बहुत भाग्यशाली थी जिस स्नेहिल परिवार में मेरा जन्म हुआ। education _B.Sc. M.A.M.ed.

26 thoughts on “अमरलता। (dodder plant)

  1. अति सुन्दर वर्णन किया है ।बिना सहारे के जीवन असम्भव होता है ।वैसे पृकृति भी। और कमजोर तो बिना सहारे के नही चल सकता ।

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  2. और कुछ नारियां छुई मुई कोमल होती तो कठोर भी दृढ इच्छा शक्ति की जिसे रावण जैसे को भी डिगाना मुश्किल|

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  3. अमरलता रूपी नारी अति कोमल और नाज़ुक अति सुंदर कल्पना।
    आज अमरलता एक सक्षम वृक्ष का रूप ले चुकी है।

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    1. वास्तव में कविता में दो कमजोर लताएं ली है। एक सहारा लेकर स्वयं का भोजन बनाने में सक्षम है दूसरी सहारा जिसका लेती है उसी का भोजन भी शोषित करती है।वो Darwin की theory के according struggle for existence and survival of the fittest को verify करती है लेकिन कवि इनकी कल्पना तुलनात्मक करता है । वो अपने भावों में जिस वृक्ष ने सहारा दिया उसी को सुखा देने का दर्द महसूस करती है ।
      आपने रचना पढ़ी इसके लिए आभार आगे आ प्रतिक्रिया देते रहिए ।ये लिखने की प्रेरणा देता रहेगा ।

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  4. So beautiful ….हमने वटवृक्ष लिखा था कुछ दिन पहले …..अमरलता पढ़ कर खुशी हुई …तुलसी की चेतना जागी थोड़ी मन मे😊😊

    बढ़िया दोस्त

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