कभी दिल से 💕

कभी स्वयं की बात करो तुम।
कभी तो अपना मुँह खोलो।
कब तक बातें गैरों की होंगी ?
कभी स्वयं की भी बोलो।
बहुत सुना है मन की तुमसे
बहुत कह दिया मन की हमसे।

अब तो दिल से बात करो तुम।
अब थोड़ा दिल को खोलो ।
मन्दिर मस्ज़िद बहुत हो गया
अब विद्यालय भी खोलो ।
जो भूखे सोते हैं घर में
उनके संग भी तुम होलो।
एक ओर हैं मित्र तुम्हारे
सारे भारत में छाए ।
दूजी ओर भरे नयन में
कितने आंसू भी आए ।
उनको पास बिठा कर अपने
प्रेम की भाषा में बोलो।
बहुत सुनी है मन की तुम से
अब थोड़ा दिल से बोलो।✍️

Published by (Mrs.)Tara Pant

बहुत भाग्यशाली थी जिस स्नेहिल परिवार में मेरा जन्म हुआ। education _B.Sc. M.A.M.ed.

15 thoughts on “कभी दिल से 💕

  1. मन और दिल एक ही है ।समझने का फेर है।बात समझ में आनी चाहिए ।अति सुन्दर कविता ।

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