दुख-सुख 😪🌻

दुख पहाड़ के पत्थर सा है

सर पर गिरता है।


ज्यूँ संगमरमर की


सीढ़ी पर


पैर फिसालता है

सुख फूलों की बारिश सा है।

देवों का एहसास ।

तन मन प्रफ्फुलित कर देता,

छू लेता है आकाश।

अपनों का अपनत्व रहे जब

अपने आस पास ।

दुख भी तन्हा नही रहे,

वो रखता है इक आस।

जीवन झरना है अनुभव का,

बहता ही रहता है।

इंद्रधनुष के रंग लिए

धुन अपनी कहता है।

कभी बना "बच्चन- मधुशाला

कभी "अश्रु" नीरज के बन,

आँखों में रहता है। ✍️

Published by (Mrs.)Tara Pant

बहुत भाग्यशाली थी जिस स्नेहिल परिवार में मेरा जन्म हुआ। education _B.Sc. M.A.M.ed.

25 thoughts on “दुख-सुख 😪🌻

  1. काली काली रात का सवेरा लाल -लाल ।
    कविता में अनुभूति बहुत गहन है ।
    संगमरमर में पैर फिसलना ऑफ़।

    Liked by 1 person

  2. काली काली रात का सवेरा लाल -लाल ।
    कविता में अनुभूति बहुत गहन है ।
    संगमरमर में पैर फिसलना ऑफ़।

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  3. जीवन अनुभव का झरना है,
    बहता रहता है
    इंद्रधनुषी रंग के लिए। सुंदर विचार..
    मुझे यह लाइनें पसंद आईं ।।🌸

    Liked by 1 person

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