रिश्ता धीरे धीरे💔

रिश्ता धीरे धीरे
रिसता ही गया।
कमजोर यहाँ
कोई था अगर,
पिसता ही गया।

बहुत मिठास थी
चालों में ,
अमृत समझा
था प्यालों में।
विष से थे भरे,
विश्वास गया।

पीड़ा थी बहुत
रिश्तों में जहाँ ।
दर्द मिला,
किश्तों में वहाँ।
सहने जो चला,
सहता ही गया।

रिश्ता धीरे -धीरे
रिसता ही गया।✍️

Published by (Mrs.)Tara Pant

बहुत भाग्यशाली थी जिस स्नेहिल परिवार में मेरा जन्म हुआ। education _B.Sc. M.A.M.ed.

25 thoughts on “रिश्ता धीरे धीरे💔

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