आज बहुत रोया ये थैला।

आज बहुत रोया यह थैला ।
लटके लटके हो गया मैला ।
कबसे कार में नहीं हूँ बैठा
जबसे बॉस तुम्हारा ऐंठा।
ले जाते थे मुझे बाज़ार।
भरते मुझमें चीज हज़ार।
कभी न मैंने ना ना की
सारी ताकत से भर लीं।
सोचा पहला भोग तुम्हारा
मुझको ही मिल जाता था।
पल भर की बस इसी ख़ुशी में
कितना मैं खिल जाता था।
सोचो कितने महिनों से,
छुपा हूँ दरवाजे पीछे।
तुमने भी जब देखा मुझको
नजरें कर लीं अपनी नीचे।
देखो इन नीची नज़रों को
अब मैं भी देख न पाऊंगा
हुए निराश अगर तुम इतना,
मैं रोने लग जाऊंगा।✍️

Published by (Mrs.)Tara Pant

बहुत भाग्यशाली थी जिस स्नेहिल परिवार में मेरा जन्म हुआ। education _B.Sc. M.A.M.ed.

17 thoughts on “आज बहुत रोया ये थैला।

  1. Aap please community ko join kriye tara jee wha bhot saree opportunity hain log aapse bhot kuchh sikhenge and aap bhi sikhengi ..wha ek writing competition ho ri jo aapke liye kafi behtar sabit hogi ..wha aap blogging ko bhi smj sakti hain achhe se ♥️aap Muje email address pr contact kriye mai aapko details deti hu ..my email address is Mylovekanhajee@gmail.com

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