वो क्यों हारी । 😢

जो बेटी घर की चहल-पहल ।
थी कोमल जैसे एक कमल।

निर्मल मन घर से जो निकल,

थी रही टहल ।
छलके वो नयन, पल पल छल छल ।
गरल भरा वह कोलाहल ।
किसने जीवन में दिया दखल ?
वह दुर्बल मन हो गई विह्वल ।
जैसे ‘बूंद गिरे धरती के पटल’ ।

मरने के बाद वो क्यों मारी ?
बिन कारण ही वह क्यों हारी ?
ध्वनि विपक्ष की हुई प्रबल।
नेता बलशाली था घर से निकल ,
चिल्लाया फिर से उछल उछल,
आओ संग में मेरे गाओ-
“बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ।”✍️

Published by (Mrs.)Tara Pant

बहुत भाग्यशाली थी जिस स्नेहिल परिवार में मेरा जन्म हुआ। education _B.Sc. M.A.M.ed.

9 thoughts on “वो क्यों हारी । 😢

  1. जिसके साथ बीती होगी वही जान सकता है ।अति भावुक चित्रण किया है ।

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