आज रजाईं है मुस्काई।☺️

आज रजाईं है मुस्काई।
बहुत दिनो से बंद बॉक्स में,
मैं थी और मेरी तन्हाई ।
रेशमी कम्बल सबको भाए,
वो ही पहले बाहर आए ।
एक अकेली सिमटी सी मैं,
बॉक्स में ले मन को मुरझाए ।

चर्चा हुई थी कल इस घर में,
कैसे ठंड में भीगा वो भाई।
झुग्गी में रहता जो बोला,
सुन सभी का मन था डोला।
मुझे बॉक्स से बाहर निकाला
और जाकर उसको दे डाला।
लगा आज अपने घर आई।
संग मेरा पाकर वो है खुश,
उसके संग मैं भी मुस्काई।✍️

Published by (Mrs.)Tara Pant

बहुत भाग्यशाली थी जिस स्नेहिल परिवार में मेरा जन्म हुआ। education _B.Sc. M.A.M.ed.

14 thoughts on “आज रजाईं है मुस्काई।☺️

  1. रजाई की आत्मकथा ।कुछ दिन आराम फिर जश्न ।सब के साथ मिलजुल कर रहना ।कितना व्यवस्थित जीवन है इसका । बहुत सुन्दर वर्णन किया है ।

    Liked by 3 people

    1. तुम्हें प्रस्तुति अच्छी लगी शुक्रिया। Sharmaji’ solutions का चिंतन अति उच्चस्तरीय होता है । पढ़ कर कुछ सिखा जाता है।

      Liked by 1 person

Leave a Reply to (Mrs.)Tara Pant Cancel reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: