लेखनी को पहली फटकार।😒

जब भावों के पुष्प लिए,
मैं पहुँची उनके पास।
छप जाएगी कविता मेरी,
मन में थी यह आस।
पर जिस कविता में लग
सिर्फ मेरी अकल
उनको लगी वो किसी
कवि की नकल।
हिंदी की थी वो एक ज्ञाता
उन्हें भला था कब यह भाता।
बोलीं, ये नकल वकल नहीं चलेगी
विज्ञान की छात्रा भी क्या कवि बनेगी।✍️

Published by (Mrs.)Tara Pant

बहुत भाग्यशाली थी जिस स्नेहिल परिवार में मेरा जन्म हुआ। education _B.Sc. M.A.M.ed.

21 thoughts on “लेखनी को पहली फटकार।😒

  1. तारा जी, आपकी पहली ही कविता पढी, और दिल को छु गई । कवि हृदय होना एक बड़ी उपलब्धि है | हम मानव है हम में संवेदना है | एक कवि संवेदनशील होता है, अपने आस पास के लोगों को देखकर उसका दु :ख उभर कर आता है । बहुत-बहुत धन्यवाद ।❤️

    Liked by 2 people

  2. 😊 बहुत दुखद हुआ…
    खैर! अब तो बताना ही पड़ेगा कि कैसे छपता है !

    Liked by 2 people

  3. बहुत ही खूबसूरत रचना।👌👌👌

    विज्ञान दिमाग ने चयन किया
    और दिल ने कवि बना दिया।

    Liked by 2 people

  4. मैं विज्ञान की छात्रा हूँ . . . . यह कविता तो मुझपर ही लिखा आपने . . . ऐसा लगा . . . धन्यवाद

    Liked by 1 person

  5. बहुत कठिन है मित्र यहां पर किसी को अपनी पीड़ा समझाना , राह मिले जो सुने पथ की , कदम बढ़कर चलते जाना ।

    Liked by 1 person

Leave a Reply to रानी शर्मा ✍️ Cancel reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: