वो फिर याद आई ।🌹🙏

सवेरे सवेरे महिला दिवस की बधाई का msssage मिला।माँ सामने आ खड़ी हुईं हैं उसी कतार में जहाँ साहसी और व्यवस्थित महिलाओं के दर्शन पाती हूँ । वो एक घरेलू महिला थीं लेकिन उनमें कभी इंदिरा गांधी कभी लक्ष्मी बाई कभी मदर टेरेसा दिखाई देतीं। वो गुलशन नन्दा के उपन्यास का जमाना था लेकिन माँ शिवानी के नावेल पढ़ा करतीं। ,कृष्ण कली, अतिथि उनको पढ़ते देखा था । महादेवी वर्मा सुभद्रा कुमारी चौहान की कविताएं उनको प्रिय थीं। उनकी डायरी के कुछ पेज पढ़े हैं जिसमें महीने के आखिरी दिनों में प्रेस वाले से लेकर दूध दहीं अखबार का हिसाब लिखा देखा है। एक दो पन्नों में हम बेटियों को कुछ अच्छे तौर तरीके के विचार भी दिए हैं।
उनकी पसंद की कविता, माँ कह एक कहानी बेटा समझ लिया क्या तूने मुझको अपनी नानी ……कहती है मुझसे ये चेटी तू मेरी नानी की बेटी कह माँ लेटी ही लेटी राजा था या रानी….कह माँ एक कहानी….। वो जब भी यह कविता कहतीं हम भाव विभोर हो जाते।
माँ को याद करते हुए छोटी बहिन ने कहा था सेंट जोंस कॉलेज जाते समय वो हमारा लंच बॉक्स रखने से पहले उस रिक्शे वाले को खिलातीं जो कॉलेज ले जाता था। भले ही कॉलेज को देर हो रही होती। माँ घर में काम करने वाली आशु से बहुत स्नेह रखतीं और उसके लिए भी हर बार कुछ खरीद के लातीं जब घर के बच्चों के लिए कुछ आता। उसके परिवार की भी आवश्यकताओं की पूर्ती करतीं।
माँ के पिता से गुस्से का तरीका बड़ा विशिष्ठ था वो जब भी डैडी से नाराज होतीं तो उनसे बात नहीं करतीं तब डैडी हमसे कहा करते जरा पता लगाओ माँ क्यों नहीं बोल रहीं हैं। दूसरे तीसरे दिन वो नाराज़ी दूर हो जाती ।
माँ अपने माईके में अपने भाई बहनों में सबसे छोटी और विवाह के बाद सबसे बड़ी बहू बनी। उनकी एक अंगुली थोड़ी टेढ़ी सी थी वो बतातीं चाचा को फीस के लिए अंगूठी दे दी थी जब तुम्हारे डैडी को मालूम हुआ तो वे नाराज़ हुए थे चाचाजी पर । उनको बचाते समय ही मेरी अंगुली में लगी थी।बहुत पुरानी बात थी ये तब चाचा छोटे थे।
माँ के लिए डैडी हर वर्ष 2 अक्टूबर को गांधी आश्रम से प्योर सिल्क की साड़ी उपहार लाते जो उन्हें बेहद प्रिय थीं।……..
सवेरे भजन के बाद सर्वा बाधा विनिर मुक्तो धन धान्य सुतान्वितो मंत्र अवश्य कहतीं ।
महिला दिवस बधाई के इस बीच कई मेसेज आ गए हैं।
एक मैसेज में लिखा है,
🙏यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते,रमन्ते तत्र देवता:🙏
(जिस समाज में स्त्रियों का सम्मान होता है वहां दिव्य शक्तियां निवास करती हैं) 🙏सद्गुणों से सम्पन्न नारी सर्वदा सभी रूपों में पूजनीय है🙏
मैं मन्दिर की ओर देखती हूँ साक्षात माँ के दर्शन होते हैं मैं दिया प्रज्वलित कर माँ से कहती हूँ ,माँ महिला दिवस की बधाई । आपकी सभी बेटियां अपनी अपनी सीमाओं में सफल एवम “आनंद” मयी हैं।🌹🙏

Published by (Mrs.)Tara Pant

बहुत भाग्यशाली थी जिस स्नेहिल परिवार में मेरा जन्म हुआ। education _B.Sc. M.A.M.ed.

27 thoughts on “वो फिर याद आई ।🌹🙏

  1. सबसे पहिले आपको और माता जी को प्रणाम!!
    और, ये दिवस आप सबको मुबारक़ एवं शुक्र गुज़ार हैं जिनकी वज़ह से आज हम सबका अस्तित्व है ❤️

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    1. डॉक्टरी में व्यस्त थे 🤗परीक्षा …लिख रहे थोड़ा बहुत यदा कदा 🙂

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    2. लिखें हैं दी, पर वक़्त है! पता नहीं क्या क्या करवाता रहता है
      पोस्ट करेंगे ठहर के😜

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