जीवन भाव।

सच जीवन ,जब भावहमारे ,
लेकर बढ़ता है ।
दुख भी तन्हा नहीं रहा ,
वो हंस कर कहता है। “सुख” ,फूलों सी बारिश है
और देवों सा एहसास।
अपनों का अपनत्व रहे ,
जब अपने आस पास ।
जीवन झरना भावों का है ।बहता जाता है ।
इंद्र धनुष से रंग लिए धुन अपनी कहता है ।
कभी बना “बच्चन- मधुशाला”
कभी “नीरज” बन बहता है। ✍️

Published by (Mrs.)Tara Pant

बहुत भाग्यशाली थी जिस स्नेहिल परिवार में मेरा जन्म हुआ। education _B.Sc. M.A.M.ed.

8 thoughts on “जीवन भाव।

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