20 जुलाई💕

बिटिया मेरा दर्द मूक मैं किस से बोलूं रे।सुनने वाले भी गए ऊब ,मैं किस से बोलूं रे।बीते जाते हैं दिन जितने मैं उतना मरती हूँ।जिसदिन हँसी मैं जितना बेटी, रात को रोती हूँ।अपने रोने की बात ओ बिटिया, किस से बोलूं रे।सुन ने वाले भी गए ऊब मैं किस से बोलूं रे ।बेटी थीContinue reading “20 जुलाई💕”

इतना तो बतला मुझे कोरोना।🤔

इतना प्यारा प्यारा रिश्ता, क्या इसी जन्म में मिलता होगा ।यहाँ रंगीले फूल खिले हैं , क्या वहां भी कोई खिलता होगा। मन चाही बातें करते हम, सँग में हंसते , सँग रोते हम।दुख सुख में सबका मिल जाना जीवन बनता एक तराना।यहां ये प्यारे रिश्ते देखे ,क्या वहां भी कोई रिश्ता होगा… धरती अम्बरContinue reading “इतना तो बतला मुझे कोरोना।🤔”

वही तो मेरे राम हैं।🙏

अपने भक्तों का झुंड लिएगलियों गलियों में जाते हो।माथे में टीका लगा के तुम,भगवा झंडा फहराते हो।भ्राता लिंचिंग करके तुमने ?रक्त रंजित है नाम किया।राम मेरा बदनाम किया।हर मन-मन्दिर में राम मेरे,तुम भव्य महल बनाते हो ?ये जनता कितनी भोली है।मेरे राम के नाम से डोली है।कब भरम ये इसका टूटेगा।वो वोटों से राम कोContinue reading “वही तो मेरे राम हैं।🙏”

माया महा ठगनि हम जानी ।😪😀

माया महा ठगनि हम जानीदुनिया ये मनमानी।जब बेटी की उठी थी डोलीमाँ रोते बापू से बोली,क्यों बहे तुम्हारीआंखों से,इतना झर झर पानीअब तो चित भी उसकीपट भी उसकी।जैसे , घर की मैं पटरानी,बिटिया भी होगीउस घर की महारानी।सुन करबातें बिटिया की माँ की,बापू को हुई हैरानी ।थोड़ा सा फिर वो मुस्काए…देखा 🙄बिटिया की माँ कोContinue reading “माया महा ठगनि हम जानी ।😪😀”

वो फिर याद आई ।🌹🙏

सवेरे सवेरे महिला दिवस की बधाई का msssage मिला।माँ सामने आ खड़ी हुईं हैं उसी कतार में जहाँ साहसी और व्यवस्थित महिलाओं के दर्शन पाती हूँ । वो एक घरेलू महिला थीं लेकिन उनमें कभी इंदिरा गांधी कभी लक्ष्मी बाई कभी मदर टेरेसा दिखाई देतीं। वो गुलशन नन्दा के उपन्यास का जमाना था लेकिन माँContinue reading “वो फिर याद आई ।🌹🙏”

लेखनी को पहली फटकार।😒

जब भावों के पुष्प लिए,मैं पहुँची उनके पास।छप जाएगी कविता मेरी,मन में थी यह आस।पर जिस कविता में लगसिर्फ मेरी अकलउनको लगी वो किसीकवि की नकल।हिंदी की थी वो एक ज्ञाताउन्हें भला था कब यह भाता।बोलीं, ये नकल वकल नहीं चलेगीविज्ञान की छात्रा भी क्या कवि बनेगी।✍️

भूमिपुत्र के अश्रु।🌾🌾🌾😪🌾🌾🙏

नेता कितना हठी हठी साहठ इसका कब जाएगा…इन सर्द ठण्डी सड़कों मेंक्या किसान मर जाएगा..है कितनी रातें ये सर्द ,जब बादल गरजा करते हैं।निष्ठुर पापी दुश्मन से वो ,जम के बरसा करते हैं।सड़कों पे देखो नदियां सी,कितनीं हैं बह जातीं।हाय लहर उन नदियों की,उसकी चादर तक आतीं ।तब नेता ब्लोअर मेंमदमस्त नींद सोता है।भक्तों काContinue reading “भूमिपुत्र के अश्रु।🌾🌾🌾😪🌾🌾🙏”

वो तीन घण्टे ।🙄☺️

वे तीन घण्टे पल की तरह छोटे थे। कितने बंधे बंधे से थे । हाथ की नोट books बाहर रख examination room में enter करना लगता सब कुछ भूल चले थे।Answer sheet मिलते ही Roll numberआदि लिखना। Question paper देखने से पहले मन ही मन ईश्वर का स्मरण करना।पेपर मिलते ही पूरे प्रश्न-पत्र को देखनाContinue reading “वो तीन घण्टे ।🙄☺️”

छूटी तब आशा ।😪

सेवा भाव संगकर्त्तव्य लिए,रहता संग भय भी,करता था, अतृप्तअब छोड़ चलाहो गया हूँ तृप्त।‘आशा’ की चिंतासेवा में,मैं मग्न रहाहोकर निर्विघ्न।आशा ही तोजीवन थी मेरापर आज मुझे तोजाना है।अब मृत्यु-शांतिसंगिनी है मेरीउसका भी साथनिभाना है। ✍️