फिर से माँ की याद आ गई ।💝

बाथरूम में फिसली जब मैं ,“ओ माँ” कह कर जो चिल्लाई।आँखों से बह निकले आँसू ,फिर से माँ की याद आ गई।अलमारी खोलूं जो अपनी,रंग बिरंगे कपड़े देखूं ।तरह तरह के सूट मैं देखूं।देखी जब हेंगर में साड़ी,फिर से माँ की याद आ गई।टीवी खोलूं जब अपना मैं,मन ले डोलूं ये अपना मैं।जो मन चाहेContinue reading “फिर से माँ की याद आ गई ।💝”

शनि शिंगणापुर 🙏

पिछले वर्ष महाराष्ट्र में कई मंदिरों के दर्शन पाने का आशीर्वाद मिला। ‘शनि शिंगणापुर’ जाकर एहसास हुआ कि व्यक्ति केवल इस देवता से डरता है शायद । सबसे हटकर था यह मंदिर । ना कोई प्रवेश शुल्क, ना कोई चढ़ावा ,न कोई पुलिस हजारों की भीड़ क्रम बद्ध पंक्ति, फिर भी अनुशाशन इतना कि सबContinue reading “शनि शिंगणापुर 🙏”

माँ भी कभी….

माँ भी कभीलड़कियों सी रहीहोगी।बेटी छोटी सीअपने माँ केघर,अल्हड़ रही होगी।उछलती कूदती होगी।पिता की ‘बेटा’ आवाज,कान में गूंजती होगी।फिर…..“उस सुबह” से पहले,रात में अग्नि के फेरे ,उसे अनजान राहों पर,कहींतेजी से ले जाते।जैसे घर का इक पौधा,कही जाकर लगा आते ।वसीयत जिंदगी भर की ,किसी के नाम लिख आते ।उसे नए नाम दे जातेकोई भाभीContinue reading “माँ भी कभी….”

मैं खुद से खेलूं रे।💃👓🖼️

आँख मिचौली का खेल मैं खुद से खेलूं रे।खुद से पूछूँ आ जाऊं ? फिर आजा बोलूं रे।मन, मोबाइल, चश्मा मेरे बन गए साथी रे ।इन अपने संगी साथी बिन, कैसे रहलूं रे ।आंख मिचौली का खेल मैं खुद से खेलूं रे।खुद से पूछूँ आ जाऊँ ? फिर आजा बोलूं रे ।बोले चश्मा कहाँ छुपाContinue reading “मैं खुद से खेलूं रे।💃👓🖼️”

पल भर के रिश्ते💞

वैसे तो कई बार नैनीताल की ओर गई हूँ परंतु अक्सर रामपुर रोड काशीपुर बाजपुर के तिराहे से रास्ता confuse करता है। कार में उस दिन G.P.S. काम नही कर रहा था और हम हल्द्वानी न जाकर काशीपुर पहुंच गए थे। तब से कार रोक कर पास खड़े लोगों से रास्ता पूछ लेते हैं ।Continue reading “पल भर के रिश्ते💞”

माँ ने ऐसा feed किया,कुछ दूध में अपने घोल कर।

माँ ने ऐसा feed किया, कुछ दूध में अपने घोल कर । सबकी चिंता रही उसे, बस अपनी चिंता छोड़ कर अक्सर बेटी त्याग- भाव में, कितना कुछ कर जाए। “नारी तुम केवल श्रद्धा हो”, इस पथ को अपनाए । सिद्दार्थ छोड़ घर से जब निकले, गौतम बुद्ध बन आते । और यशोधरा चिंतित होContinue reading “माँ ने ऐसा feed किया,कुछ दूध में अपने घोल कर।”

दादी के दोहे ,🤓

देखो मेरा मस्त कलंदर ,🎈मूंछें लगा के बना सिकंदर।🎩दौड़े सरपट बाहर अंदर,जैसे राजा कोई धुरन्धर ।👑मैं कहती हूँ आजा बन्दर,🐒आजा कर लें, ‘सन्धि पुरंदर’ ।तुझे खिलाऊँ मैं चुकन्दर,🍭दोनो मिल फिर चलें जलंधर।देखो मेरा मस्त कलंदर🎈मूंछें लगा के बना सिकंदर।…✍️

भोगी राम।🙏

कभी कभी कोई व्यक्ति अपनी कर्तव्यनिष्ठा से इतना शक्तिशाली हो जाता है कि वर्षों तक संपर्क टूट जाने पर भी वो अपने व्यक्तित्व की याद दिलाता रहता है ।ऐसा ही एक व्यक्तित्व “चौकीदार भोगीराम” का तब सामने आ खड़ा होता है जब वर्षों बीत जाने के बाद वो आज भी अपनी उपस्थिति का अहसास कराताContinue reading “भोगी राम।🙏”

पाठ अधूरा।

कितना भी परफेक्ट हो टीचर,कुछ ही मिनट पढ़ाता है।पीरियड ओवर होते ही,फिर वापस वो हो जाता है ।       ऐ मेरी ज़िंदगी बता तू ,       कब तक मुझे पढ़ाएगी ?       मेरे ही अनुभव से मुझको       कब तक तू सिखलाएगी ।माँ ने अंगुली थाम बरस में,चलना मुझको सिख लाया,और पिता भी कुछ महीनों में,बोल मेरे होंठों तकContinue reading “पाठ अधूरा।”

कोई दूर से आवाज दे ।😪

वो अक्सर महीने में दो बार आता saturday या sunday . एक साफ रंग वाला मोहिला सा युवक था वो कभाड़ी वाला । बिना ट्यूब टायर की उसकी साईकल की आवाज ही उसकी call bell थी ।पैंट को अपनी पतली कमर में साधने के लिए नाड़े का उपयोग करता । belt नहीं रही होगी उसकेContinue reading “कोई दूर से आवाज दे ।😪”