पंडित जी के जूते।

घर में दीदी का विवाह था। बड़ा उत्साह था विवाह में हम बच्चे उस समय बहुत उत्साहित थे । रात भर कन्यादान पूजा पाठ चलता रहा। कन्यादान के बाद सुबह कब हुई, पता ही नहीं चला । रात को सभी बहन भाइयों ने गुप्त meeting की थी। जीजाजी के जूते छुपाने की । कुछ बुद्धिमानContinue reading “पंडित जी के जूते।”

मेरे अपने

इस दुनिया मे कितने आए,कितने आकर चले गए। कितने दिल मे बसे रहे,कितनो को हम भूल गए । कितने फूलों की खुशबू से,अब भी महका करते हैं। कितने आंगन के पंछी बन,अब भी चहका करते हैं। जितने जलसे हुए खुशी में ,बन आशीष ‘वो’ संग रहे। यह जीवन होली सी रंगत ,‘वो’ रंग की रंगतContinue reading “मेरे अपने”

आज याद आ गयी

वैज्ञानिकों तुम्हारी जय हो तुमने पृथ्वी को प्रकाशित किया अपनी मेहनत और लगन से।आज अंधेरा करके दिया जलाकर आप की याद आ गई । आशा है फिर से आप कोरोना की medicine खोज निकाल कर इस तम को दूर करेंगे। 🙏

गुरु शिष्य दोनों खड़े किसके लागूं पांव ।

उस दिन वो शिक्षिका बच्चे का हाथ पकड़ क्रोधित हो बोली मैडम इसे अपने रूम में बिठा लीजिए । ये बहुत misbehave करता है । क्लास में आते ही ये हंसता है । मुझे देखते ही बच्चा sorry बोला। कई बार उस शिक्षिका द्वारा उस बच्चे के लिए ढीठ शब्द का उपयोग किया जाने लगाContinue reading “गुरु शिष्य दोनों खड़े किसके लागूं पांव ।”

भय की दौड़।

भव्य राम मंदिर बन ने का पहला चरण सम्पन्न हुआ। काश इन्हीं दूर तक चलने वालों में Make in india ढूंढा जाता। इन्हीं में से कई मिल्खा सिंह और पी.टी. उषा मिल जाते। लेकिन ये तो भूख और भय की दौड़ है। जो मैराथन से कई गुना अधिक दूरी तय करवाएगी । इस दौड़ काContinue reading “भय की दौड़।”

डर लगता है उस बच्चे से।😪

समय के इस दौर में आदमी भूल गया उस रचयिता को जिसने बड़े शौक से इस दुनिया की रचना की होगी ।विशेषकर भारतवर्ष की रचना करते समय उसका मूड बहुत अच्छा रहा होगा। एक बच्चे के innocent brain सा । जो अपनी ड्राइंग में सूरज, पहाड़, बादल, वर्षा, पेड़ -पौधे ,हरियाली , नदी ,नाव ,खेतContinue reading “डर लगता है उस बच्चे से।😪”

माँ 💝🙏

सच मानो माँ के जाने पर…..माँ ही हरदम आती है ।आंसू निकले जब आंखों से…..वो रुमाल बन जाती है।कभी वो आई “ईजा” बन कर ….कभी ध्वनि बन, “ओ मेरी माँ ” ।सभी छूटते धीरे धीरे ….छूट ना पाये मेरी माँ । ✍️

बोन्साई

तुमने आकर मुझको काटा,मुझमें ही कुछ मुझको छाँटा।सीमाओं में बांध दिया,इक छोटे से आँगन में ।जैसे सागर तपता है,सावन में जल देने को।लो मैं भी तैयार खड़ा हूँ,तुमको फल देने को । ✍️

अपनापन🌱

मैं हूँ और मेरा सूनापन,कितना इसमें है अपनापन ।कभी बनाया पंछी इसने,कभी बनाया है आकाश।दूर रहे तुम जितना मुझसे,ये ले आया अपने पास ।सुलझाया मेरा उलझा मन।🌷कितना इसमें है अपनापन ।मैं हूँ और मेरा सूनापन…बहुत दूर थी मैं अपने से,जब तक तेरे पास रही मैं।आज हुई जब दूरी तुझसे,इसे किया मैंने सब अर्पन।महकाया मेरा मनContinue reading “अपनापन🌱”