भय की दौड़।

भव्य राम मंदिर बन ने का पहला चरण सम्पन्न हुआ। काश इन्हीं दूर तक चलने वालों में Make in india ढूंढा जाता। इन्हीं में से कई मिल्खा सिंह और पी.टी. उषा मिल जाते। लेकिन ये तो भूख और भय की दौड़ है। जो मैराथन से कई गुना अधिक दूरी तय करवाएगी । इस दौड़ काContinue reading “भय की दौड़।”

डर लगता है उस बच्चे से।😪

समय के इस दौर में आदमी भूल गया उस रचयिता को जिसने बड़े शौक से इस दुनिया की रचना की होगी ।विशेषकर भारतवर्ष की रचना करते समय उसका मूड बहुत अच्छा रहा होगा। एक बच्चे के innocent brain सा । जो अपनी ड्राइंग में सूरज, पहाड़, बादल, वर्षा, पेड़ -पौधे ,हरियाली , नदी ,नाव ,खेतContinue reading “डर लगता है उस बच्चे से।😪”

माँ 💝🙏

सच मानो माँ के जाने पर…..माँ ही हरदम आती है ।आंसू निकले जब आंखों से…..वो रुमाल बन जाती है।कभी वो आई “ईजा” बन कर ….कभी ध्वनि बन, “ओ मेरी माँ ” ।सभी छूटते धीरे धीरे ….छूट ना पाये मेरी माँ । ✍️

बोन्साई

तुमने आकर मुझको काटा,मुझमें ही कुछ मुझको छाँटा।सीमाओं में बांध दिया,इक छोटे से आँगन में ।जैसे सागर तपता है,सावन में जल देने को।लो मैं भी तैयार खड़ा हूँ,तुमको फल देने को । ✍️

अपनापन🌱

मैं हूँ और मेरा सूनापन,कितना इसमें है अपनापन ।कभी बनाया पंछी इसने,कभी बनाया है आकाश।दूर रहे तुम जितना मुझसे,ये ले आया अपने पास ।सुलझाया मेरा उलझा मन।🌷कितना इसमें है अपनापन ।मैं हूँ और मेरा सूनापन…बहुत दूर थी मैं अपने से,जब तक तेरे पास रही मैं।आज हुई जब दूरी तुझसे,इसे किया मैंने सब अर्पन।महकाया मेरा मनContinue reading “अपनापन🌱”

बंगला नंबर 10

22 quarters की उस छोटी सी कॉलोनी में कुछ दिनों पूर्व ही बंगला नंबर 10 मिसेस कुशवाह को अलॉट हुआ था। दो बेटियां और एक बेटे की माँ थीं वो ।अक्सर अपनी बड़ी बेटी को organic chemistry पढ़ाया करती थीं। कुछ इस तरह से कि उनकी आवाज से मुझे भी Organic compounds acids अल्कोहल केContinue reading “बंगला नंबर 10”

कुछ रिश्ते 💖

रिश्ते जो मन से होते हैं, तन से उनका क्या लेना।मन ही मन में पलते हैं वो,चलता है लेना देना।प्रभु को किसने कब देखा है ,पर दर्शन हो जाते हैं।मन मंदिर में जब वो आते,नयन स्वयं झुक जाते हैं।कुछ रिश्ते माँ की छाया से, उम्र का उनसे क्या लेना।प्यार से जब बातें हों उनसे, लगताContinue reading “कुछ रिश्ते 💖”

“आशिफ़ा”

आ बेटी आशिफ़ा आ …गोदी में मेरी तू आ …आँसू से नहलाऊंगी…तुझको मैं सहलाऊंगी।थोड़ा सा ले पानी पी…थोड़ा सा ले खाना खा।आ बेटी आशिफ़ा आ।गोदी में मेरी आजा….धर्म से फिर विश्वास उठा है….बस दर्द तेरा अहसास हुआ है…आ थोड़ा सा पानी पी….संग में मेरे खाना खा।आ बेटी आशिफ़ा आ।आज निर्भया दिवस मनाया…उसकी माँ संग जश्नContinue reading ““आशिफ़ा””