माँ ने ऐसा feed किया,कुछ दूध में अपने घोल कर।

माँ ने ऐसा feed किया, कुछ दूध में अपने घोल कर । सबकी चिंता रही उसे, बस अपनी चिंता छोड़ कर अक्सर बेटी त्याग- भाव में, कितना कुछ कर जाए। “नारी तुम केवल श्रद्धा हो”, इस पथ को अपनाए । सिद्दार्थ छोड़ घर से जब निकले, गौतम बुद्ध बन आते । और यशोधरा चिंतित होContinue reading “माँ ने ऐसा feed किया,कुछ दूध में अपने घोल कर।”

दादी के दोहे ,🤓

देखो मेरा मस्त कलंदर ,🎈मूंछें लगा के बना सिकंदर।🎩दौड़े सरपट बाहर अंदर,जैसे राजा कोई धुरन्धर ।👑मैं कहती हूँ आजा बन्दर,🐒आजा कर लें, ‘सन्धि पुरंदर’ ।तुझे खिलाऊँ मैं चुकन्दर,🍭दोनो मिल फिर चलें जलंधर।देखो मेरा मस्त कलंदर🎈मूंछें लगा के बना सिकंदर।…✍️

भोगी राम।🙏

कभी कभी कोई व्यक्ति अपनी कर्तव्यनिष्ठा से इतना शक्तिशाली हो जाता है कि वर्षों तक संपर्क टूट जाने पर भी वो अपने व्यक्तित्व की याद दिलाता रहता है ।ऐसा ही एक व्यक्तित्व “चौकीदार भोगीराम” का तब सामने आ खड़ा होता है जब वर्षों बीत जाने के बाद वो आज भी अपनी उपस्थिति का अहसास कराताContinue reading “भोगी राम।🙏”

पाठ अधूरा।

कितना भी परफेक्ट हो टीचर,कुछ ही मिनट पढ़ाता है।पीरियड ओवर होते ही,फिर वापस वो हो जाता है ।       ऐ मेरी ज़िंदगी बता तू ,       कब तक मुझे पढ़ाएगी ?       मेरे ही अनुभव से मुझको       कब तक तू सिखलाएगी ।माँ ने अंगुली थाम बरस में,चलना मुझको सिख लाया,और पिता भी कुछ महीनों में,बोल मेरे होंठों तकContinue reading “पाठ अधूरा।”

कोई दूर से आवाज दे ।😪

वो अक्सर महीने में दो बार आता saturday या sunday . एक साफ रंग वाला मोहिला सा युवक था वो कभाड़ी वाला । बिना ट्यूब टायर की उसकी साईकल की आवाज ही उसकी call bell थी ।पैंट को अपनी पतली कमर में साधने के लिए नाड़े का उपयोग करता । belt नहीं रही होगी उसकेContinue reading “कोई दूर से आवाज दे ।😪”

पंडित जी के जूते।

घर में दीदी का विवाह था। बड़ा उत्साह था विवाह में हम बच्चे उस समय बहुत उत्साहित थे । रात भर कन्यादान पूजा पाठ चलता रहा। कन्यादान के बाद सुबह कब हुई, पता ही नहीं चला । रात को सभी बहन भाइयों ने गुप्त meeting की थी। जीजाजी के जूते छुपाने की । कुछ बुद्धिमानContinue reading “पंडित जी के जूते।”

मेरे अपने

इस दुनिया मे कितने आए,कितने आकर चले गए। कितने दिल मे बसे रहे,कितनो को हम भूल गए । कितने फूलों की खुशबू से,अब भी महका करते हैं। कितने आंगन के पंछी बन,अब भी चहका करते हैं। जितने जलसे हुए खुशी में ,बन आशीष ‘वो’ संग रहे। यह जीवन होली सी रंगत ,‘वो’ रंग की रंगतContinue reading “मेरे अपने”

आज याद आ गयी

वैज्ञानिकों तुम्हारी जय हो तुमने पृथ्वी को प्रकाशित किया अपनी मेहनत और लगन से।आज अंधेरा करके दिया जलाकर आप की याद आ गई । आशा है फिर से आप कोरोना की medicine खोज निकाल कर इस तम को दूर करेंगे। 🙏

गुरु शिष्य दोनों खड़े किसके लागूं पांव ।

उस दिन वो शिक्षिका बच्चे का हाथ पकड़ क्रोधित हो बोली मैडम इसे अपने रूम में बिठा लीजिए । ये बहुत misbehave करता है । क्लास में आते ही ये हंसता है । मुझे देखते ही बच्चा sorry बोला। कई बार उस शिक्षिका द्वारा उस बच्चे के लिए ढीठ शब्द का उपयोग किया जाने लगाContinue reading “गुरु शिष्य दोनों खड़े किसके लागूं पांव ।”