माँ का श्राद्ध दिवस 🙏

ना जाने कुछ,
“शब्द बंधे से” ।
माँ की याद
दिलाते हैं ।
“हरि ओम तत्सत”
“हरि ओम तत्सत”,
भजन जब भी हम,
दोहराते हैं।
कथा सत्यनारायण की
जब भी पढ़ी है।
लगा संग हमारे माँ ,
आ के खड़ी है।
सिर में रखे वो पल्लू ,
प्रश्न पूछती माँ ,
बता तू कलावती
रात भर रही कहां ?
माँ आंखों से खींचे थी,
लक्ष्मण सी रेखा ।
जिसे हमने डर से
हमेशा था देखा ।
वो कम बोलती थी,
वो हंसती भी कम थी ।
मगर सारी दौलत
माँ की हस्ती से
कम थी। 🎉🎉🙏 ✍

Ideal Inspiration Blogger Award.

Ideal Inspiration Blogger Award.

Many thanks to dear Anushree for nominating me for this award.
She is an interesting blogger with her own way of expressing her thoughts.Do check out her each blog You will find some thing new there. Anushree Shrivastava@strong soul.
I am also very much thankful to the founder of the award Rising Star(https://ideal inspiration.blog)
For inspiring the writers.
Rules:-Rules :-
1.Thank the person who has nominated you and provide a link back to his/her blog.

  1. Answer their questions.
  2. Nominate up to 9 other bloggers and ask them 5 new questions.
  3. Notify the nominees through their blog by visiting and commenting on their blog.
  4. List the rules and display the “Ideal Inspiration Blogger Award” logo.
  5. Provide the link to the Award creator ,( https://idealinspiration.blog/A

Questions to me :
1-Which post of your own is your favorite?

_My sentiments are with all my posts.Sawanka jhoola, Kavi ki kavita hoon(सावन का झूला), Aao milkar jhoome (आओ मिलकर झूमें), khichdi (खिचड़ी), Pleasure and World Press.

2-If you would write a book, what would it be about?
_I would like to write a book about the child psychology what environment getting them matured before age ,their changing behaviour though physically they are like a bud of a flower.

3-If you’re asked to suggest a book, which one will you prefer ?
_Countless treasure of knowledge is there in our Libraries.I would like to request to enjoy the library but as you asked me, I would say for ‘Discovery Of India'( भारत एक खोज )written by Jawahar lal Nehru or to the ‘Pearls Of Wisdom’ written by Dr.Abdul Kalam.

4-If everything will be okay..someday, will you be thankful to the lockdown . If it is yes, or no accordingly, then Why ?
I will be very thankful to the God but to the lock down I would say O.K. bye bye. As God realized us not to go against the nature. God has provided us biosphere. We should be aware to keep it clean.
5-What motivates you to survive or live your life ?
My emotions, my
relations, my requirements and the blessings of the running time are all these charms of my life which motivate me to survive🙏

My nominees are :

1 Madhusudan
madhreo.com
2 Nimish
drnimish.wordpress.com
3 सम्बन्धों की धरन
hindiposters.in
4Gottfried
Banter Republic
5 beautifulpeopleinc.
com
6 गुफ्तगू -ए- ज़िंदगी /AS. WHISPERS OF LIFE
7csincere.wordpress.com
8Noorien Misbha
gowriteandexplore
9 मंथन
aparnatalx.wordpress
.com

My questions to my respected and
Inspirational nominees are :-
Q1_Which prayer or song your mother likes/liked.
Q2_If you were a teacher which subject would you like to teach?
Q3_Write any two qualities of your father which you follow.
Q4_What attracts you in small children ?
Q5_What message do you want to give to the world through Word Press?

Thank you all again for love, support and inspiration…..
🙏

दुख-सुख 😪🌻

दुख पहाड़ के पत्थर सा है

सर पर गिरता है।


ज्यूँ संगमरमर की


सीढ़ी पर


पैर फिसालता है

सुख फूलों की बारिश सा है।

देवों का एहसास ।

तन मन प्रफ्फुलित कर देता,

छू लेता है आकाश।

अपनों का अपनत्व रहे जब

अपने आस पास ।

दुख भी तन्हा नही रहे,

वो रखता है इक आस।

जीवन झरना है अनुभव का,

बहता ही रहता है।

इंद्रधनुष के रंग लिए

धुन अपनी कहता है।

कभी बना "बच्चन- मधुशाला

कभी "अश्रु" नीरज के बन,

आँखों में रहता है। ✍️

Word Press💖 वर्ल्ड प्रेस💖

कितना प्यारा ‘वर्ड प्रेस’ ये
दिल को ‘हाइक’ ले चलता है।
इस एकाकी पन में हमसे

लाइक-लाइक कहता है।
कितना सूदिंग वर्ड है लाइक

डिसलाइक से तीन है कम।
तीन की संख्या कम हो चाहे,
कितना होता इसमें दम।
लॉक्ड डाउन में इसने अपना

कितना साथ निभाया है।

अनजानों को साथ में लाकर

मानव- प्रेम पढ़ाया है।

दुनिया का ईश्वर एक ही,
एक ही अपना रचनाकार।
लोगों ने चाहे मनचाहे,
अपने दिए हैं इसे आकार।

एक सी भाषा हँसने की है,
एक ही भाषा रोने की
एक ही चेहरा मुस्कानों का,
एक सा ही तो गाने का।
शब्द भले हों अलग अलग
पर बातें कितनी अपनी सी ।

भक्ति करी गर मन्दिर में तो
इसने मस्ज़िद भी पहुंचाया ।
दर्द बड़ा था जब भी अपना
चर्च ने भी आ सहलाया ।

ईश्वर ने कर प्यार हमें
कितने उपहार हैं दे डाले।
देखो वर्ड प्रेस में आकर
‘एकाकार-प्रेम’ को कैसे
रखा इसने है पाले। ✍️

माँ की सातवीं बेटी 💕🌷

कानपुर की कुछ धुंधली सी यादेँ हैं पर बीना के जन्म की याद नहीं। इसके जन्म के कुछ महिने बाद बबीना ट्रांसफर हो गया था डैडी का । हाँ इसको गोदी में घुमाने की याद है । माँ सुलाते समय कुछ लोरी सा गाती थीं। पड़ोसियों के घर वालों के नाम लेकर और कुछ दूर बने कॉलोनी के ओवर हेड टैंक को “टंकु” कह कर । ये बहुत देरी से सोती। वो गातीं “दत्ता बाबू के बॉबी को टंकु ले गया” ये डर कर आंखे बंद करती और सो जाती थी।

उस दिन माँ बहुत घबराई सी देखीं थीं। घर में सब ‘बच्चे’ को ढूंढ रहे थे ।’बच्चा’ कहां गया, ‘बच्चा’ कहां गया ? घर के पीछे एक पानी से भरा गड्ढा था लोग उसे डंडे से खंगालने लगे थे, इसमें तो नही गिरा । माँ सीधे पानी से भरे उस गड्ढे में कूद गईं थीं। बच्चे को ढूंढ़ने। बचपन में बीना को सब “बच्चा” नाम से ही बुलाते थे । फिर किसी एक की नज़र उस टंकी पर पड़ी जिसके साइड में बनी खड़ी सीमेंट की सीढ़ियों से ये बच्चा कुछ ऊपर चढ़ गया था। उन खड़ी सीढ़ियों से बड़ी सावधानी से उसे नीचे उतारा गया । गिर जाने का डर जो था । बच्चा डेढ़-दो साल की आयु का रहा होगा । सब चिल्लाए ‘बच्चा मिल गया’ मिल गया । माँ ने अपने आंसू पोछे और घर जा कर पूजा में घंटी बजाने लगीं थीं । ‘बच्चा’ जो मिल गया था।

यादें फिर माँ को समीप ले आईं हैं और एक आवाज माँ की भी आ पहुंची ,”Happy birthday dear Beena.🔔🔔🔔💕… ✍️

“चाय वाला वो बच्चा।”🚶🏃

आज फिर उसकी याद आ गई।वैसे तो सड़क के सफर में अक्सर सड़क -किनारे वाली चाय पीना पसन्द करती हूँ। अधिकतर एक बड़े से हरे भरे पेड़ के नीचे उनका चार पहिये पर ठेला आकर्षित करता है और यहां पेड़ की हवा एक रेस्तरां के एसी से कहीं अधिक लुभावनी होती है और बहुत प्यार से बनाते हैं ये लोग चाय। उनका चीनी कम या ज्यादा पूछना बहुत आत्मीय और सम्मान सा देता है ।
आज स्कूल के बाहर चाय वाले की भी यादआई तो मिसेज.वाजपेयी को ग्वालियर फ़ोन लगा कर नाम पूछा । नाम भूल गई थी चाय वाले का । हाँ उन्होंने याद दिलाया ‘लाले’ था वो । एक मुस्कुराता सौम्य सा चाय वाला ।मुश्किल से उम्र 20-22 वर्ष रही होगी उसकी । ठेला नहीं था उसके पास। एक मेज पर अपना स्टोव रखता था। विद्यालय के ठीक सामने हाई कोर्ट के कई वकील उसकी चाय पीने आते । उस दिन 15 अगस्त था। एक बच्चा चाय की केतली और कप लेकर कार्यालय के बाहर खड़ा था ।उसकी नजर दौड़ते हुए उन सैकड़ों बच्चों पर थी जो हाथों में छोटे तिरंगे और बैलून लिए थे। सरस्वती बाई एक कप चाय उस से ले आई थी । वो अभी भी बच्चों को देख रहा था । मैंने कार्यालय में कार्य रत कमलेशजी से उसे बुलाने को कहा ।वो शर्माता हुआ अंदर आया। उसके हाथ में जब मैंने झंडा और बैलून दिए, वो खुशी में इतनी तेजी से दौड़ा कि उसकी उस खुशी को देखने के आनंद का एहसास आज भी है।
वो दो तीन दिन बाद फिर मेरे कक्ष के बाहर खड़ा था।मैंने उसे अपने पास बुलाया पूछा ‘लाले’ कौन है तुम्हारा ? वो बोला मेरे मामा हैं। मैंने पूछा स्कूल क्यों नहीं जाते हो ? बोला छोड़ दिया । पहले गाँव में पढ़ता था।पूछने पर, पढ़ोगे तो बोला हाँ पढूंगा। उसे इलमारी से एक नोट बुक में अक्षर लिख कर पूछे तो उसने एक ही बार में पढ़ लिए थे। अंग्रेजी के कैपिटल लेटर्स भी उसने पढ़े लेकिन स्माल लेटर्स वो नही पढ़ पाया था। उसे एक नोट बुक में प्रति दिन कुछ लिखने को देती वो उत्साह से लिख कर लाता। उस दिन दोनों हाथ जोड़ते हुए बोला मैडम मेरा दाखिला भी कर दो ।
न जाने क्यों उस बच्चे में क्या था कि रात भर सोचती रही उसका विद्यालय में कैसे प्रवेश कराऊँ । मेरे विद्यालय के 2nd क्लास के बच्चों का अध्धयन स्तर उस से कहीं अधिक था और उम्र भी उसकी लगभग 10 वर्ष रही होगी।
दूसरे दिन मराठा बोर्डिंग के निकट स्थित सरकारी प्राथमिक विद्यालय का विचार आया । वहाँ के प्रधानाध्यपक श्री नागेंद्र जी से चर्चा करने पर मैंने उनसे मिलने की अनुमति ली ।
फिर लाले की चाय की दुकान आते ही मैंने जैसे ही कार रोकी बच्चा मुस्कुराया । मैं बोली थी आ जाओ तुम्हें घुमा कर लाऊं। वह अपने मामा (लाले) का मुँह देखने लगा।
फिर दौड़ कर आ गया। मैंनें कहा आओ बैठो तुम्हें एक स्कूल दिखाऊँ वो बहुत खुश था।उसे रास्ते में सब समझा दिया था कि वो बहुत अच्छा बच्चा है ,स्कूल में जाकर नमस्ते कहना है और जो पूछा जाए उसका उत्तर देना।
प्रधानाध्यापक नागेंद्र सर की कृपा से बच्चे को 5वीं में प्रवेश मिल गया था इस विश्वास पर कि बच्चा मेहनत कर लेगा ।
वो अक्सर अपने विद्यालय में किया गया कक्षा-कार्य दिखाने आता।एक अजीब सी लगन थी उस बच्चे में। मैं भी अपने को न रोक पाती उसकी नोट बुक में एक पेपर में very good लिख कर रख दिया करती।
मई जून का महीना रहा होगा। वो कक्ष के बाहर खड़ा था आज उसके हाथ में चाय की केतली नही थी वह अपना परीक्षा परिणाम लेकर मुस्कुरा रहा था। अपने को रोक नही पाई थी। उसके हाथ से रिजल्ट ले लिया था । वो बहुत अच्छे अंकों से उत्तीर्ण हो गया था । मैंने खुशी से उसे अपने विद्यालय के झूले में बिठा कर जोर से झुलाना शुरू कर दिया था।
आज बहुत दूर हूँ ग्वालियर से वो भी इन वर्षों में बड़ा हो गया होगा। 19-20 वर्ष की आयु का होगा । मैं भी नौकरी छोड़ कर आ गई थी ।✍️

समय अच्छा चल रहा है।🙏🎉🎉🎉🎉🎉🎉🎉

इस locked down में आज ना जाने क्यों तरुण सागर दिगंबर महाराज जी की याद आ गई। वैसे तो किसी विशेष गुरु की भक्त नहीं हो पाई परंतु कृपालुजी महाराज के वेदों की स्मरण शक्ति एवं तरुण सागर जी के प्रवचन बिना पूरा सुने अधूरा सा लगता। कभी कभी तरुण सागर जी का चेतावनी देते प्रवचन देना धीमे स्वर में बोलते बोलते स्वरों का ऊंचा कर देना जैसे पूरे मस्तिष्क में प्रतिध्वनि पैदा कर देता।
उस दिन उनके प्रवचन का वो किस्सा याद आता है जब उन्होंने अपने मित्र से पूछा,”हाल चाल कैसे हैं ?” मित्र ने उत्तर दिया ,”बस समय काट रहा हूँ।” उसके बाद उत्तर में तरुण सागर जी का प्रतिध्वनित करता वो उत्तर,”अरे तू समय काट रहा है या समय तुझे काट रहा है ?”

Loc ked down के 5 महीने से ऊपर हुए।
तबसे किसी के हाल चाल पूछने पर ये जवाब देने से डरती हूँ कि बस समय काट रही हूँ । तबसे कहती हूँ, ‘ऊपर वाले की कृपा से समय अच्छा चल रहा है ।’✍️

कभी दिल से 💕

कभी स्वयं की बात करो तुम।
कभी तो अपना मुँह खोलो।
कब तक बातें गैरों की होंगी ?
कभी स्वयं की भी बोलो।
बहुत सुना है मन की तुमसे
बहुत कह दिया मन की हमसे।

अब तो दिल से बात करो तुम।
अब थोड़ा दिल को खोलो ।
मन्दिर मस्ज़िद बहुत हो गया
अब विद्यालय भी खोलो ।
जो भूखे सोते हैं घर में
उनके संग भी तुम होलो।
एक ओर हैं मित्र तुम्हारे
सारे भारत में छाए ।
दूजी ओर भरे नयन में
कितने आंसू भी आए ।
उनको पास बिठा कर अपने
प्रेम की भाषा में बोलो।
बहुत सुनी है मन की तुम से
अब थोड़ा दिल से बोलो।✍️

तुझपे दिल कुर्बान🇮🇳🇮🇳🇮🇳

हाथों से दिल तक 💕….छोड़ कर अपनी जमीं को दूर आ पहुंचे हैं हम….फिर भी है बस ये तम्मन्ना तेरे ज़र्रों की कसम…हम जहाँ पैदा हुए उस ज़मीं पे निकले दम…तुझपे दिल कुर्बान.
🇮🇳.