राहत इंदौरी जी अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि।💔🙏🌼🌼🌼

मन बहुत दुखी है । आज सुना राहत इंदौरी साहब नहीं रहे ।मेरे जन्माष्ठमी के त्योहार का उत्साह गमगीन सा हुआ ।राहत जी के दिल और मन की बात सुनना बहुत अच्छा लगता है
….फूलों की दुकान खोलो, खुशबू का व्यापार करो,इश्क़ खता है तो ये खता सौ बार करो।

….लगेगी आग तो आएंगे कई मकान सद में , यहां कोई अपना ही घर थोड़े है

…..अपनी पहचान मिटाने को कहा जाता है,बस्तियां छोड़ के जाने को कहा जाता है।

न जाने क्यों भाव, भाषा, शैली में बहुत अंतर था लेकिन कवि नीरजजी के बाद राहत इंदौरी जी बहुत अपने से लगे थे। दुख है अब कोई दूसरे राहत इंदौरी न आ पाएंगे।कितनी अधूरी सी लगती है कभी ये जिंदगी।अभी तो और भी बहुत सुनने का मन था राहत जी से।
उन्हें मेरी अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि।

Nominated for Liebster Award….

Tara Pant.

Thank you so much dear Anushree Shrivastav for nominating me for this award.

It really means a lot to me. Anushree….really you are blessed with an impressive pen. I read your each and every post on blog and feel the pleasure of the mission -save your daughter and educate her’ (‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ।’) Lots of blessings and love to you.

Dear bloggers…. Please do check Anushree’s blog: https://ashree2412blogspot.wordpress.com//wp.me/pcbSJf-1s

Rules for this award :-

1- Thanks the blogger who has nominated you and provide the link of their blog.

2- Answer the 11 questions given to you.

3- Nominate 11 other blogger and ask your nominees 11 question.

4- Notify your nominees once you have uploaded your post.

My answers :-

1- Introvert or extrovert? Reason?
Ans- Extrovert…… because it is best way of communication .

2- Which is your favourite movie and why?

Ans- Recently I saw a hindi movie , chappar faad ke'(छप्पड़ फाड़ के) I liked that as it tells us usually we people are honest until we get the opportunity to be dishonest.It’s a comedy movie.It alerts the people the real happiness is in honesty.

3- When is your birthday?

Ans- 14th of November.

4- who is your favourite blogger?

Ans- Each and every blogger….has his/her point of attraction.🎉💕

5- Describe yourself in 5 words.

Ans- love kids,want to give support to the needy, faith on one Universal-God’ Emotional,some times angry too.

6- what’s your ambition?

Ans- the blessings of God may be there all around me .🎉🙏

7- What’s special about the country you live in?

Ans- lndia is a largest democratic country .It’s unity in diversity spreads the rainbow colours and make it very beautiful.People call their country as mother India. The country is also blessed by geographycally.It has sea mountains (Himalaya) rivers deserts etc. It’s culture and places also attract the foreigners to visit India. India.

8- Favourite destination outside your country?

Ans- …Singapore my brother lives there.

9- Best advice by your best friend

Ans- My sisters are my best friends they say, “You are a bold lady.Take it easy.

10 -Your best way of passing time .

Ans- Reading blogs of word press by which I meet with the thoughts of the different people of different countries also . The other best way of my passing time is talking with the children, where I enjoy the childhood .

11- Tell one of your good memory.

Ans- When my mother and father met me first time after my marriage . I was smiling ,they were also smiling but both having tears in their eyes .

Thank you so much bloggers, For reading this

☆ Questions are for the every nominees as below 👇

1_Who named you and what is it’s meaning ?

2_What is your skill or hobby ?

3_Do you feel the presence of God ?

4_What is some thing that you afraid of ?

5 sweet memory of your childhood ?

6_Why do you get angry ?

7_Which flower do you like most ?

8_If you are crossing a land during a hot summer , you see a tree and sit under it What will you say to that tree ?

10_What lesson has COVID 19 Locked down given to you ?

11-What are you thankful for ?

9_If you could meet any poet or writer dead or alive ,who would he/ she be and why ?

Note :- I will separately nominate eleven , each and every blogger on their respective blogs !!

Thanks again to Anushree Shrivastav for supporting my work especially for the nomination. I look forward to reading more your post in future also. Thanks.

राम धुन।🙏

रघुपति राघव राजाराम।
पतित पावन सीता राम।।
सीता राम सीता राम।
भज प्यारे तू सीता राम।।
ईश्वर अल्लाह तेरे नाम।
सबको सन्मति दे भगवान।
रघुपति राघव राजा राम ।
पतित पावन सीता राम।।

संदर्भ: यह भजन हमारे राष्ट्र पिता महात्मा गांधी को बहुत पसंद था। यह भजन हिंदुओं के धार्मिक ग्रंथ ‘गीता’ में दिए भजन से कुछ अलग था जिसमें गाँधीजी ने समय की मांग के अनुसार और सभी धर्मों के लोगों को जोड़ने के लिए कुछ नई पंक्तियों को स्वयं जोड़ा था। स्वतंत्रता के दिनों में यह भजन घर घर गाया जाने लगा। इस भजन ने भावनात्मक रूप से एक दूसरे को बांध दिया था। गाँधीजी के राम केवल हिंदुओं के नहीं वरन सभी धर्मों की अपनी अपनी आस्था के प्रतीक थे । ईश्वर अल्लाह में भी वो समाहित हो जाते थे। गाँधीजी के इस पसंदीदा भजन में देश के लोग केवल प्रेमभाव में मग्न हो जाते थे। यही तुलसी के रामचरित मानस में रामजी का आदर्श मानव चरित्र भी था ।✍️
आइए गाँधीजी के पसंद की ये राम धुन का आनंद लें।,

The devotee of Rama prays him by different names as Raghupati,Raghav or as the Lord Rama He believes that lord Rama can even purify the sinners.He is also called by Allah or God.The devotee prays for good under standung to all people. under standung or wisdom to all the people.

Wordings :
Raghu pati Raghav
Raja Ram.
Patit Pawan Sita Ram.
Sita Ram Sita Ram.
Bhaj Pyare tu SitaRam.
Ishwar allah tere naam.
Sbko sanmati de bhagwaan.
Raghupati Raghav Raja Ram Patit pawan Sita Ram.
Enjoy that Ram dhun.✍️

शुभ राखी 💕💝,🎉🔔🔔🔔

भाव तुम्हारे पाकर पहुँची,
इस दुनिया के पार।
जहाँ तुम्हारी गरिमा थी
और आनन्द था अपार।
ये छोटे छोटे से सुख,
जाने क्या कर जाते।
दुनिया के सारे दुख जैसे
छूमन्तर हो जाते।
इन भावों में सच मानो तुम,
ईश्वर का सुख पाती हूँ।
मन्दिर के घण्टों की गूँज ये,
मैं नतमस्तक हो जाती हूँ।✍️

Theme of the poem:
I reached across the world with my sentiments to you..where there was only your dignity and pleasure. I am surprised that those little moments give me a lots of happiness and all my sorrows disappear. Rely on me , during these moments I feel the presence of God in a temple with the echos of bells and I bow there.

आज ।

संग मेरे आकर के बैठा ,
सहमा सहमा “आज”।
कभी सिसकता कभी सुबकता मुझसे बोला, “आज”
मंदिर मस्जिद होटल ढाबे
में, रुदन रोज करता हूँ ,
पर बहरों के कानों में चिल्लाकर रोया

आज” ।
इधर उधर स्वर गूंज रहा है ,
“ईद मुबारक” आज ।
“दर्द भी उसका खुल के रोया कहता मुझसे “आज।”✍️

एक विचार। A Thought🤔🌷

अपराध के बाद उस व्यक्ति में भय की भावना उत्पन्न होना, ईश्वर द्वारा दिया गया सबसे बड़ा दंड है।✍️

After committing a crime,the feeling of fear in that person, is the punishment given by the God.

तकिया। ‘Pillow’

तकिया तू कितनी प्यारी है ।रिश्ते में सबसे न्यारी है।

तेरे बिन बिस्तर है सूना।
तू जो मिले आनंद है दूना।
शोभा तेरी कितनी न्यारी ।
सच तुझ पर दिलवारी है ।

तकिया तू कितनी प्यारी है …
तकिया तू कितनी प्यारी है।

ज्यूँ ही बिस्तर मैं जाता हूँ,
मुझको गले लगा कर रखती।
आंखें बंद करूँ जैसे ही,
स्वप्न दिखाती कभी ना थकती।
दुनिया तुझपर वारी है।
तकिया तू कितनी प्यारी है..
तकिया तू कितनी प्यारी है।

दुख में सुमिरन सब करते हैं।
मैंने सुख में याद किया है।
पेट भरा था जब भी मेरा,
दौड़ा तेरे पास मैं आया।
दुनिया से मुँह मोड़ के आया।
सारे नाते तोड़ के आया।
सच तुझ पर दिल वारी है।

तकिया तू कितनी प्यारी है…
तकिया तू कितनी प्यारी है।

थक कर जब भी चूर हुआ मैं,
याद तेरी ही आई है ।
तब और ना कोई भाया मुझको बस तू ही तो भाई है ।
तुझ पर जाँ बलिहारी है।

तकिया तू कितनी प्यारी है…
तकिया तू कितनी प्यारी है।

तुझ संग प्यारी नींद जो आई,
पहुंच गया मैं मुम्बई , पूना।
जब चाही थी साईकल मैंने,
तूने दिलवाई थी लूना।
तुझ पर दिल बलिहारी है ।

तकिया तू कितनी प्यारी है…
तकिया तू कितनी प्यारी है ।

माँ की लोरी सी तू बन कर,
सर गोदी में रख लेती है ।
स्वप्न लोक में ले जाकर के ,
चिंताएं सब हर लेती है ।
तेरी दुनिया तो न्यारी है।

तकिया तू कितनी प्यारी है ।
तकिया तू कितनी प्यारी है।✍️

Theme of poem ‘Pillow’
How sweet are you the Pillow. You are the best in my relationship .Without you the bed is incomplete.. You gives the double pleasure.The people use to remember the Power when they are sad but l came to you apart all relations, whenever
my stomach was full. You carried me in the world of dreams and gave me more then my desire.You dear pillow is like a sweet song of my mother taking my head on your lap you removes all my worries.
You are my sweet and lovely Pillow.

रंगशाला “Theater”.

कभी सफल हुए कभी
असफल थे।
कभी असफल होकर
सफल रहे।

कुछ याद रहे कुछ भूल गए।
जो याद रहे वो पास रहे।
भूले थे जिन्हें भूले न गए।
वो दूर भी रह कर पास रहे।

कभी सफल हुए कभी
असफल थे …..

कुछ अहम रहा कुछ वहम रहा।
कुछ सत्य रहा कुछ भरम रहा ।
जो सत्य लगा भरमाया रहा।
जो भरमाया वो सत्य लगा।
इस सच और झूठ की दुनिया में,
कभी सफल हुए कभी असफल थे ……

जो दर्द कभी अनजाना था,
वो दर्द कभी अपना सा लगा।
अपनों ने जिसे सहलाया था।
जिसे सहलाया क्यों दर्द हुए ।

कभी सफल हुए कभी असफल थे……
कभी आशाएं बन गईं रुदन।
कहीं रुदन बनीं थीं आशाएं।
कभी जीवन था पर मृत्यु हुई।
कभी मृतक हुई सी आशाएं।

कभी सफल हुए कभी,
असफल थे…..

हैमलेट की सोलिलोकवी कभी। कभी आर्कमडीज़ की यूरेका।
कभी बच्चन की मधुशाला थे।
कभी नीरज के से गीत हुए।

कभी सफल हुए कभी,
असफल थे…..

जीवन की इस रंगशाला में
हम चरित्र बने और
दर्शक भी।
कभी ध्वनि करतल की
गूंजीं थीं ।
कभी अश्रुपूर्ण
जलधार हुए ।

कभी सफल हुए
कभी असफल थे।
कभी असफल होकर
सफल रहे। ✍️

Theme_In this theater of life some times we succeed or failed.some times the failure is the cause of success or the success becomes the cause of failure.
The people whom we wanted to forget but could not .Though they are very far but felt as very close.
Often he pain of unknown became our pain and it is caressed by us. some times this caressed becomes the cause of our pain. It is seen our hopes are the cause of frustration or the frustration is the cause of hopes.
Some times we felt isolated as Hamlet was seen with his soliloquies or we look energetic as Archimedes’s shouting Ureka after getting success in his experiment.

Our life is a theater where we play the role of a character as well as of a spectator and during that role we heard the echo of claps or the eyes with shower of tears. ✍️

सावन का झूला।☘️

वो सावन का झूला
बहुत याद आया।
वो सावन का झूला
बहुत याद आया।
वो माली का घर था
था बच्चों का मेला।
उन बच्चों का आपस में
नंबर झमेला।
अब मेंरी अब तेरी
बारी जो आई।
ऊंची से ऊंची थीं ,
पेंगे बड़ाईं।
वो मेहंदी वाले हाथों से
झूले की पकड़ें ।
वो पायल वाले पैरों
में नई नई चप्पलें।
वो लड़कों का झूले में
सर्कस दिखाना ।
और लड़कियों का
‘ओए-ओए’ चिल्लाना।
ये सावन का महीना जो
फिर लौट आया,

वो सावन का झूला
बहुत याद आया।
वो सावन का झूला
बहुत याद आया।

वो स्कूली मैदां में
पतंगें उड़ाना।
वो रंगीन माँझों से
उनको लड़ाना।
पतंग कट गई जब
‘वो काटा’ चिल्लाना।
वो सावन न फिर से
कभी लौट पाया।
किसी को ना देखा,
किसी को न पाया।
बस उस जगह था,
यादों का साया।
वो कोयल की कुहू
का हमको जगाना।
वो वर्षा की बूँदों
का हमको भिगाना।
वो मैदां के पानी में
छप्प-छप्प के चलना
था जीवन का कैसा
वो मीठा ज़माना।
वो माली का घर था,
था जिसमें वो झूला।
वो सावन का झूला
बहुत याद आया।
वो सावन का झूला
बहुत याद आया ।✍️