समय

“दुख” पहाड़ के पत्थर सा है, सर पर गिरता है ,ज्यूँ संगमरमर की सीड़ी में पैर फिसलाता है। अपनों का अपनत्व रहे जब अपने आस पास ,दुख भी तन्हा नही रहा, वो हँस कर कहता है। जीवन झरना है भावों का बहता ही रहता है। इंद्रधनुष के रंग लिए धुन अपनी गाता है। कभी बना “बच्चन मधुशाला” कभी “अश्रु” नीरज का बन आँखों में रहता है। ✍️

मन मंदिर

मन के मंदिर में थोड़ा टहल,मन के बाहर तो भव्य महल। मन- मंदिर में दीपक सा है तू ,भव्य महल तो चहल पहल। हनुमान के सीने में , राम सिया, क्यों इत उत डोले पागल-पिया । थोड़ा तू ठहर जीवन की पहर सन्ध्या में बदलने वाली है…….। फिर राम अली दिखते संग संग, रमजान हो या ,दीपावली है ।मत बांट मनुज धर्मो में तू इतिहास करेगा थू थू थू । ये भारत पाक (पाकिस्तान) नहीं । क्यों रखता दिल को साफ नहीं ।योगी है तू मत बन भोगी ,बदले की कभी कहता जोगी ? भारत की शाख समझ भाई, माँ के अपने चार सिपाही, हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई।

👉थोड़ा तू ठहर जीवन की पहर,सन्ध्या में बदलने वाली है। फिर राम अली दिखते संग संग,रमजान हो या दिवाली हो।🛐🕉️

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“मर्म उसका”

आदत सी बन गयी थी रात जब नींद नहीं आती तब मोबाइल में अपनो के बदले गए profile स्टेटस देखती । उनकी बेटी ने फिर अपनी प्रोफाइल में अपने पापा की तीन पिक्स डाल दी थीं और लिखा था पापा अगले जन्म में भी आप ही मेरे पापा होंगे। मैं उसके पापा की pics बार बार देखती। बड़ा ही आकर्षित व्यक्तित्व था।कुछ महीने पहले बद्रीनाथ से उनकी पत्नी का फ़ोन आया था बहनजी हम बद्रीनाथ पूजने आये हैं । पर्स में एक पर्ची मिली जिसमे आपका फ़ोन नंबर है।इसीलिए आपको फ़ोन लगाया है ।ये बात ग्वालियर छोड़ने के 9 साल बाद हुई थी। लो अपने भाईसाहब से बात करो वे बोलीं। ।हेलो कहने से पहले वे ठहाका लगा कर हंसे जो उनकी ओर आकर्षित करता वे यादव थे । बचपन में स्कूल जाने पर बेटी आरती उन्ही की देखभाल में रहती और आरती को हम आरती यादव के नाम से बुलाते। Mrs. Yadav एक घरलू महिला थी।पूरी तरह से Mr. Yadav की सेवा में भी तल्लीन। उनके कपड़े ऐसे सलीके से रखतीं जैसे हर रोज venish से धुले हों । घर मे ही iron करतीं। उनके पास बैठने पर चर्चा केवल यादव साहब की ही होती। पिछले महीने मैंने फ़ोन लगाया बोली तुम्हारे भाई साहब की तबियत ठीक नही है लो बात करो । फोन पर फिर उनके ठहाके की आवाज सुनाई दी । कुछ नहीं डॉक्टर ने किडनी की problem बताई है homeopathic इलाज शुरु किया है । उस दिन उन्हें तुरंत नोयडा आने को कहा था । किडनी मैं दूंगी बोली थी मैं । 11 जनवरी को पता चला वो पंचतत्व में विलीन हो गए……….. कल फिर फोन लगाया बेटी कह रही थी आंटी हमें आपका इंतजार था ।पापा मेरे सपने में अक्सर आते हैं। लीजिए मम्मी से बात कीजिये ,वहां से रोने की आवाज आई बोलीं पन्त मैडम मैने उनकी ज़िंदगी भर सेवा की साथ दिया लेकिन एक महीना हो गया बेटी के सपने में आए मेरे सपने में क्यों नही आए वो भारी आवाज़ और वो रुदन का मर्म दिल में भारी पन ला रहा था।मैं इधर चुप चाप आंसू बहाने लगी और उस उस मार्मिक शिकायत के मर्म का अहसास करती रही। 🙏✍️